अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के लिए अब तक फॉर्मेट तय नहीं, अलग-अलग कमरे में भी हो सकती है बात

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर वार्ता में शामिल होने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल पहुंच चुके हैं। ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी तस्नीम की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी टीम आज दोपहर इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शरीफ से मिलेगी।

ईरानी डेलिगेशन में 71 लोग शामिल हैं, जो शुक्रवार देर रात को पाकिस्तान पहुंचे। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का फॉर्मेट अभी भी सुनिश्चित नहीं है।

बातचीत के लिए कई इंतजाम किए गए हैं, जिसमें आमने-सामने बातचीत और अलग-अलग कमरों में बातचीत, दोनों शामिल हैं। सूत्र ने कहा कि पाकिस्तान ने दोनों स्थितियों के लिए तैयारी कर ली है। इस्लामाबाद या तो दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत कराने के लिए तैयार है या उनके डेलीगेशन के लिए अलग-अलग जगहों का इंतजाम करके उनके बीच संदेश पहुंचाने के लिए तैयार है।

अल जजीरा के अनुसार, अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के इस्लामाबाद में एक ही होटल में रुकने की उम्मीद है, लेकिन वे आमने-सामने बातचीत नहीं करेंगे। इसके बजाय, उम्मीद है कि वे अलग-अलग कमरों में रहेंगे, जबकि पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच मैसेज पहुंचाएंगे।

वहीं दोनों पक्षों के नेताओं का बयान भी अलग-अलग आ रहा है। एक तरफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने के साथ-साथ यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ना चाहता है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस समझौते में 99 फीसदी हिस्सा ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना है।

होर्मुज संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि स्ट्रेट को किसी भी कीमत पर खोला जाएगा, भले ही इसके लिए ईरान साथ हो या नहीं। दूसरी तरफ तस्त्रीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इस्लामाबाद पहुंचने पर गालिबफ ने सावधानी भरा रुख अपनाया और कहा कि ईरान अच्छे इरादों के साथ लेकिन भरोसे के बिना बातचीत में शामिल हो रहा है।

ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व कर रहे संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि बातचीत के पिछले राउंड लगातार पक्के नतीजे देने में नाकाम रहे हैं। बदकिस्मती से अमेरिकियों के साथ बातचीत का हमारा अनुभव हमेशा नाकामी और कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन वाला रहा है।

तेहरान की स्थिति बताते हुए गालिबफ ने जोर दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका के नजरिए पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा, “अगर अमेरिकी पक्ष एक असली समझौता करने और ईरानी लोगों के अधिकार देने के लिए तैयार है, तो वे समझौता करने के लिए हमारी तैयारी भी देखेंगे।”

उन्होंने डिप्लोमैटिक कोशिशों में बेईमानी के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि अगर बातचीत का इस्तेमाल बिना किसी असली इरादे वाले कामों को छिपाने के लिए किया गया तो ईरान इसका कड़ा जवाब देगा।