अमित शाह के रोड शो से पहले केरल के बेपोर में तैयारियां जोरों पर, स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह

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बेपोर, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के रोड शो से पहले केरल के बेपोर में तैयारियां जोरों पर हैं। अमित शाह के कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में भी जबरदस्त उत्साह है। उन्होंने खुशी जाहिर करते हुे कहा कि भाजपा आएगी तो राज्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बेपोर के एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा, “हमारे नेता अमित शाह आ रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग यहां जुटे हैं। हर कोई उनका इंतजार कर रहा है। वे बहुत अच्छे नेता हैं। हम सभी को खुशी है कि वे यहां आ रहे हैं।”

एक और भाजपा समर्थक ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वे (अमित शाह) बहुत अच्छी लीडर हैं। हम लोग उन्हें पसंद करते हैं। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि अमित शाह के दौरे को लेकर हमें खुशी है। भाजपा आएगी तो राज्य में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री मित शाह रविवार को केरल में कई सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उनका पहला कार्यक्रम बेपोर निर्वाचन क्षेत्र में है, जहां वे एक रोड शो करेंगे। यह रोड शो बेपोर के मथोतप्पम बिजिथ जंक्शन क्षेत्र में किया जाएगा।

इसके बाद, वे दोपहर 2:30 पर एर्नाकुलम के कुन्नाथुनाद निर्वाचन क्षेत्र में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करेंगे। शाम 5:15 बजे अमित शाह दक्षिणी तिरुवनंतपुरम के कट्टकड़ा निर्वाचन क्षेत्र में जनसभा करेंगे। वे रात 8 बजे तिरुवनंतपुरम के थंपानूर में प्रवासी कार्यकर्ताओं की बैठक में शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से अमित शाह केरल की जनता से संवाद करेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

भाजपा नेता और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी रविवार को केरल में चुनाव प्रचार करने पहुंचे हैं। जेपी नड्डा ने तिरुवनंतपुरम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में हमने पीएम मोदी के नेतृत्व में एक जबरदस्त बदलाव देखा है। पिछले 11 साल में, उन्होंने राजनीतिक दलों के कामकाज और शासन-प्रशासन के मामले में राजनीतिक संस्कृति को ही बदल दिया है।

जेपी नड्डा ने कहा, “भाजपा और भाजपा के नेतृत्व वाली सभी सरकारें जन-हितैषी, जवाबदेह, सक्रिय और जिम्मेदार सरकारें हैं। इसी वजह से दूसरी राजनीतिक पार्टियों को भी इसी राह पर चलना पड़ता है। नहीं तो, पहले ध्रुवीकरण, ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति और तुष्टीकरण का बोलबाला था। राजनीतिक पार्टियां समाज के हर तबके से समर्थन जुटाती थीं, लेकिन सरकार बनने पर वे किसी खास जाति, समुदाय या इलाके की सरकार बनकर रह जाती थीं। विकास का काम भी सिर्फ मुख्यमंत्री के चुनाव क्षेत्र या उसके आस-पास के इलाकों तक ही सीमित रहता था। पहले यही राजनीतिक संस्कृति थी, लेकिन अब यह बदल चुकी है।”