मुंबई, 13 फरवरी (आईएएनएस)। एनसीपी (एसपी) के नेता अनिल देशमुख ने पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह को घेरा है। देशमुख ने कहा कि उनके पाप अब सामने आ रहे हैं और लीलावती अस्पताल के कार्यकारी निदेशक पद से हटाया जाना, उनके असली चेहरे को उजागर करता है।
देशमुख ने आरोप लगाया कि जब वे महाराष्ट्र के गृह मंत्री थे, तब परम बीर सिंह ने उन्हें बदनाम करने की साजिश रची और झूठे आरोप लगाए। अब एक-एक कर उनकी भ्रष्ट गतिविधियां सामने आ रही हैं। लीलावती अस्पताल ने जिस अपमानजनक तरीके से उन्हें हटाया, उससे महाराष्ट्र की जनता के सामने सच्चाई आ गई है।
अस्पताल के ट्रस्टियों और डॉक्टरों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, परम बीर सिंह पर गंभीर कदाचार के आरोप हैं। आरोप है कि उन्होंने कई डॉक्टरों से प्रमोशन दिलाने के नाम पर 25-25 लाख रुपए वसूले। इन कथित अनियमितताओं को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने उन्हें उनके पद से हटा दिया।
देशमुख ने 2021 में उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर ‘एंटीलिया’ के बाहर मिले विस्फोटकों की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान परम बीर सिंह ने सरकार को गुमराह किया। मामले में संदेह पैदा होने के बाद जांच एंटी-टेररिज्म स्क्वाड को सौंप दी गई थी।
देशमुख का दावा है कि एटीएस की जांच में संकेत मिले कि पूरे प्रकरण के मास्टरमाइंड परम बीर सिंह थे। इसी कारण उन्हें तत्काल हटाया गया और बाद में सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
देशमुख ने यह भी आरोप लगाया कि बर्खास्तगी से बचने के लिए परम बीर सिंह ने उन पर 100 करोड़ रुपए के वसूली रैकेट का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद इन आरोपों की जांच की मांग की थी, जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति चांदीवाल की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई। लेकिन, परम बीर सिंह छह बार समन जारी होने के बावजूद जांच समिति के सामने पेश नहीं हुए।
देशमुख के मुताबिक, गिरफ्तारी के डर से वे फरार हो गए और बाद में अपने वकील के माध्यम से हलफनामा दायर कर कहा कि उनके पास देशमुख के खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
पूर्व गृह मंत्री ने अब लीलावती अस्पताल से जुड़े घटनाक्रम की गहन जांच की मांग की है और कहा है कि यह मामला एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से जुड़े गंभीर आरोपों का है, जिसे पूरी पारदर्शिता के साथ सामने लाया जाना चाहिए।

