नई दिल्ली, 8 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में हर माता-पिता की सबसे बड़ी चिंता होती है अपने बच्चे की सेहत। जरा-सी खांसी, बुखार या पेट दर्द होते ही हम तुरंत इलाज की ओर भागते हैं। लेकिन इसी के साथ दवाइयों के साइड इफेक्ट का डर भी रहता है। ऐसे में होम्योपैथी एक ऐसा विकल्प है, जिसे कई लोग सुरक्षित इलाज के रूप में देखते हैं।
होम्योपैथी की सबसे खास बात यह मानी जाती है कि इसमें दवाइयां बहुत हल्की और शरीर के अनुरूप होती हैं। यही वजह है कि बच्चों के लिए इसे अक्सर पसंद किया जाता है। छोटे बच्चों का शरीर नाजुक होता है, इसलिए माता-पिता चाहते हैं कि इलाज ऐसा हो जो असरदार भी हो और नुकसानदायक भी न हो। होम्योपैथी इस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती है।
बचपन में बच्चों को बार-बार सर्दी-जुकाम, खांसी, पेट की गड़बड़ी या दांत निकलने के समय परेशानी जैसी कई छोटी-छोटी समस्याएं होती रहती हैं। ऐसे मामलों में कई परिवार होम्योपैथी पर भरोसा करते हैं। माना जाता है कि यह सिर्फ बीमारी को दबाने के बजाय शरीर की अंदरूनी प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को बेहतर बनाने पर ध्यान देती है।
एक और वजह जिससे लोग होम्योपैथी की ओर आकर्षित होते हैं, वह है इसका आसान सेवन। इसकी दवाइयां अक्सर मीठी गोलियों के रूप में होती हैं, जिन्हें बच्चे बिना किसी परेशानी के ले लेते हैं। यह बात भी माता-पिता के लिए राहत भरी होती है, क्योंकि बच्चों को कड़वी दवा खिलाना अक्सर मुश्किल हो जाता है।
बच्चों के विकास के दौरान उनकी इम्युनिटी मजबूत होना बहुत जरूरी होता है। इस संदर्भ में होम्योपैथी को कुछ लोग एक सहायक विकल्प के रूप में अपनाते हैं, जिससे बार-बार होने वाली बीमारियों की आवृत्ति कम करने में मदद मिल सके। हालांकि, इसके साथ संतुलित आहार, साफ-सफाई और सही दिनचर्या भी उतनी ही जरूरी है।
हालांकि, यह समझना भी जरूरी है कि हर तरह की बीमारी के लिए एक ही तरीका सही नहीं होता। होम्योपैथी को कई लोग हल्की और शुरुआती समस्याओं में उपयोगी मानते हैं, लेकिन गंभीर या आपात स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। सही इलाज वही है, जो बच्चे की स्थिति के अनुसार चुना जाए।

