बांग्लादेश पर सावधानी बरतनी होगी, पाकिस्तान उसे भारत के खिलाफ इस्तेमाल करना चाहता है: राजीव शुक्ला

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नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की स्थिति को लेकर राज्यसभा में चिंता व्यक्त की गई। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला का कहना है कि हमें संतुलन अपनाना चाहिए और यह प्रयास करना चाहिए कि बांग्लादेश पाकिस्तान के पाले में न जाए।

राजीव शुक्ला ने कहा कि मैं विदेश मंत्री से कहना चाहता हूं कि बांग्लादेश के मुद्दे पर हमें बहुत सावधानी बरतनी होगी। 1971 में भारत के समर्थन से पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश का निर्माण हुआ। वह भारत की एक ऐतिहासिक कूटनीतिक और सामरिक उपलब्धि थी। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में पूरा देश एकजुट था, अटल बिहारी वाजपेयी ने भी समर्थन दिया था, लेकिन आज अगर हम बांग्लादेश को अपनी नीतियों से पाकिस्तान के पाले में धकेल देंगे तो यह हमारे लिए गंभीर रणनीतिक भूल होगी। पाकिस्तान हमेशा यही चाहता है कि बांग्लादेश उसके साथ खड़ा हो और वह उसकी जमीन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए करे।

राजीव शुक्ला ने कहा कि वहां की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन हमें संवेदनशील और संतुलित कूटनीति अपनानी चाहिए। जब क्रिकेट को लेकर भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच विवाद हुआ, तो आईसीसी ने सबको एक मेज पर बैठाकर समाधान निकाल लिया। अगर एक खेल संस्था संवाद से मसला सुलझा सकती है, तो हमारी सरकार क्यों नहीं कर सकती?

उन्होंने कहा कि हमें टकराव नहीं, संवाद और समाधान की नीति अपनानी चाहिए। दरअसल, वह राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान बोल रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि बजट में कुछ ऐसा है ही नहीं जिसकी प्रशंसा की जा सके।

राज्यसभा में बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि चाहे रोजगार की बात हो, चाहे कृषि रोजगार हो या ग्रामीण रोजगार हो, कहीं कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अब सप्लीमेंट्री बजट पेश करें। उन्होंने सदन में बोलते हुए कहा कि ये कैसा भारत बना दिया है। यही आज सबसे बड़ी चिंता है।

राजीव शुक्ला ने कहा कि दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा है बेरोजगारी। आज लगभग 15 प्रतिशत बेरोजगारी की बात कही जा रही है। इसका मतलब है कि करोड़ों युवा रोजगार से वंचित हैं। हर साल लगभग ढाई करोड़ नए युवा नौकरी के लिए बाजार में आते हैं। अगर उनके लिए अवसर नहीं होंगे, तो स्थिति गंभीर सामाजिक चुनौती बन सकती है। सरकारी विभागों में लाखों पद खाली हैं, लेकिन भरे नहीं जा रहे। ‘मेक इन इंडिया’ का भविष्य क्या है, यह भी स्पष्ट नहीं दिखता। छोटे उद्योग और धंधे बंद हो रहे हैं। जीएसटी और अन्य नियमों के बोझ से छोटे व्यापारी और उद्यमी परेशान हैं। अगर उद्यमी ही देश छोड़कर चले जाएंगे, तो रोजगार कौन देगा? एक आम व्यक्ति के जाने से फर्क नहीं पड़ता, लेकिन अगर इंटरप्रेन्योर जाता है, तो उसके साथ रोजगार के अवसर भी चले जाते हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे याद है, 2012 में योजना आयोग के समय चर्चा हुई थी कि हर साल ढाई करोड़ नए युवाओं को रोजगार की जरूरत होगी। तब सुझाव दिया गया था कि स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाए और सरकार व निजी क्षेत्र मिलकर काम करें, लेकिन आज स्किल डेवलपमेंट के लिए ही पर्याप्त बजट नहीं बढ़ाया गया है। इसलिए मेरा निवेदन है कि संशोधित बजट में स्किल डेवलपमेंट के लिए अधिक धनराशि आवंटित की जाए, ताकि युवाओं को प्रशिक्षण मिले, उद्यमियों को प्रोत्साहन मिले और रोजगार के नए अवसर पैदा हों। साथ ही, व्यापारियों पर अनावश्यक दबाव और दंडात्मक कार्रवाई कम की जाए, ताकि वे भयमुक्त होकर काम कर सकें।”

उन्होंने कहा कि देश को टकराव नहीं, समाधान चाहिए। युवाओं को भाषण नहीं, रोजगार चाहिए। और विदेश नीति में दूरी नहीं, संतुलन और संवाद चाहिए।

वहीं, इस दौरान सदन में केंद्रीय कौशल विकास राज्य मंत्री जयंत चौधरी मौजूद थे। उन्होंने राजीव शुक्ला की बात का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वह पूरे सदन को स्पष्टीकरण देना चाहते हैं। राजीव शुक्ला को जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “सदन को मैं यह बताना चाहता हूं कि केंद्रीय बजट में कौशल विकास का आवंटन बढ़ाया गया है। इस वर्ष कौशल विकास के लिए बजट में 62 प्रतिशत की वृद्धि की गई है।”