बंगाल में हार के डर से भाजपा को निशाना बना रही है तृणमूल कांग्रेस : सुवेंदु अधिकारी

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कोलकाता, 13 फरवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस हार के डर से भाजपा को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के खिलाफ तोड़फोड़ की घटनाएं इसी डर को दिखाती हैं।

सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कुछ लोग दक्षिण 24 परगना जिले के बेहाला (पूर्व) विधानसभा क्षेत्र में दीवारों पर लिखे भाजपा के नारे मिटाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को इस तरह रोका नहीं जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि दक्षिण कोलकाता जिले के बेहाला पूर्व विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 122 के बूथ 156 और 157 में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जानबूझकर कई दीवार पर भाजपा की लिखावट मिटा दीं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में विपक्ष की आवाज दबाने की ऐसी कोशिशें निंदनीय और शर्मनाक हैं। उन्होंने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी निशाना साधा और निष्पक्ष राजनीतिक माहौल की मांग की।

नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि दीवारों से नारे मिटाने से तृणमूल कांग्रेस की सरकार लोगों के दिलों से भाजपा के विचार नहीं मिटा सकती। उनका दावा है कि जनता का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि लोग अपने वोट के लोकतांत्रिक अधिकार का इस्तेमाल करके हर अन्याय का जवाब देंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में डर और आतंक की राजनीति ज्यादा समय तक नहीं चलने दी जाएगी।

सुवेंदु अधिकारी ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने सोशल मीडिया पर भाजपा के खिलाफ तोड़फोड़ की घटनाओं को उठाया है। उनका आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता लगातार भाजपा को निशाना बना रहे हैं।

इससे पहले, 11 फरवरी को भी उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था। उस वीडियो में कुछ लोग भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के झंडे फाड़ते और जलाते हुए दिखाई दे रहे थे। भवानीपुर वही सीट है जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विधायक हैं। अधिकारी का कहना है कि लोकतंत्र में इस तरह की घटनाएं ठीक नहीं हैं और राजनीतिक दलों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।