नई दिल्ली, 15 फरवरी (आईएएनएस)। बीते वर्ष 2025 में भारतीय थलसेना ने 10 राज्यों में 80 से अधिक स्थानों पर 141 टुकड़ियां तैनात कीं। हालांकि सेना की इन टुकड़ियों की तैनाती का मकसद कोई युद्धक तैयारी नहीं, बल्कि शांति और सहायता था। इन अभियानों के दौरान भारतीय सेना ने 28 हजार 293 नागरिकों को बचाया।
वहीं 7,318 लोगों को चिकित्सा सहायता प्रदान की गई। यही नहीं, आपदा में फंसे 2,617 व्यक्तियों तक भारतीय सेना ने बेहद आवश्यक राहत सामग्री भी पहुंचाई। युद्धभूमि से अलग सेना के ये प्रयास उसे आपदा राहत का अग्रदूत बनाते हैं।
भारतीय सेना ने न केवल देश में बल्कि मुसीबत आने पर विदेशों में भी बचाव अभियान चलाए हैं। म्यांमार में आए भूकंप के बाद भारत सरकार ने मार्च 2025 में ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया था। इसके अंतर्गत म्यांमार में भारतीय थलसेना को तैनात किया गया था। यहां तैनात जवानों ने प्रभावित क्षेत्रों में 60 बिस्तरों वाले फील्ड अस्पताल तैयार किए और मात्र दो सप्ताह के भीतर 2,500 से अधिक भूकंप प्रभावित लोगों को चिकित्सा उपचार प्रदान किया।
केंद्र सरकार के मुताबिक, इस दौरान छह विमानों और भारतीय नौसेना के पांच जहाजों के माध्यम से लगभग 750 मीट्रिक टन आपदा राहत सामग्री प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाई गई। मुसीबत में फंसे पड़ोसी को मदद पहुंचाने का एक बड़ा उदाहरण अभी हाल ही में श्रीलंका में देखने को मिला। बीते दिनों चक्रवात दितवाह के बाद श्रीलंका में संपर्क व्यवस्था बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसको बहाल करने में भारतीय सेना ने अहम योगदान दिया। यहां 2,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालने और 1,058 टन राहत सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ संचालित किया गया। इस अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने विदेशी नागरिकों सहित 264 जीवित बचे लोगों को सफलतापूर्वक निकाला।
केंद्र सरकार के अनुसार, मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियान भारत की वैश्विक भागीदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत आंतरिक रूप से और प्रभावित देशों को समय पर, समन्वित तथा सुव्यवस्थित सहायता प्रदान करता है। प्रतिकूल वातावरण में भी कार्य करने की क्षमता, संगठनात्मक कौशल व रसद संबंधी जानकारी सशस्त्र बलों को एचएडीआर अभियानों के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। यह बार-बार स्पष्ट हुआ है कि भारतीय सशस्त्र बल आपदा की स्थिति में पहले प्रतिक्रिया देने वाले साबित हुए हैं। इसका उद्देश्य आपदाओं के दौरान नागरिक क्षमताओं के चरमरा जाने पर ‘शीघ्र, कुशल, समन्वित और प्रतिक्रियाशील’ प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। जब नागरिक क्षमताएं सीमित हो जाती हैं, तो भारत सरकार अक्सर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राहत प्रयासों को बढ़ाने के लिए सशस्त्र बलों को तैनात करती है।
केंद्र का कहना है कि भारतीय सेना बचाव एवं राहत कार्यों के लिए सैनिकों की तैनाती, क्षेत्रीय अस्पतालों की स्थापना, आवश्यक बुनियादी ढांचे की बहाली और मानवीय सहायता पहुंचाने का कार्य करती है। भारतीय नौसेना विदेशों से भारतीय नागरिकों को निकालने, राहत सामग्री के परिवहन और समुद्री एवं तटीय सहायता के लिए जहाजों तथा हेलीकॉप्टरों की तैनाती के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वहीं भारतीय वायुसेना प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री, चिकित्सा दल और आपदा प्रतिक्रिया कर्मियों को पहुंचाने के साथ-साथ निकासी एवं बचाव अभियान चलाकर रणनीतिक व सामरिक हवाई सहायता प्रदान करती है। इन प्रयासों के पूरक के रूप में, भारतीय तटरक्षक बल चक्रवात, सुनामी, भूकंप, तेल संयंत्रों में आग और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ के दौरान सहायता प्रदान करता है, जिससे त्वरित प्रतिक्रिया तथा समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होती है। भारतीय सशस्त्र बल, देश की संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के अपने मूल दायित्व का निर्वहन करते हुए, मानवीय सहायता में भी अग्रणी व प्रथम प्रतिक्रिया बल के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

