बिहार: नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दिखेगी भारतीय संस्कृति, परिधानों में रेशम और खादी

0
2

राजगीर, 29 मार्च (आईएएनएस)। नालंदा विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह 31 मार्च को राजगीर स्थित स्थायी परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इस समारोह में राष्ट्रपति एवं नालंदा विश्वविद्यालय की विजिटर द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

इस समारोह में विश्वविद्यालय ने परंपरागत दीक्षांत परिधानों में बदलाव करते हुए भारतीयता और स्थिरता को केंद्र में रखते हुए विशेष अकादमिक परिधान तैयार किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने औपनिवेशिक काल के गाउन की परंपरा से अलग विद्यार्थियों के लिए खादी के वस्त्रों का विकल्प चुना है, जबकि विशिष्ट अतिथियों और आगंतुकों के लिए भागलपुर के अहिंसा रेशम (पीस सिल्क) से निर्मित वस्त्र तैयार किए गए हैं।

बताया गया कि अहिंसा रेशम एक पर्यावरण-अनुकूल और क्रूरता-मुक्त कपड़ा है, जिसमें रेशम के कीड़ों को बिना हानि पहुंचाए उनके कोकून से स्वाभाविक रूप से बाहर आने दिया जाता है। यह कपड़ा हल्का, आरामदायक और स्थानीय जलवायु के अनुरूप होता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह परिधान भारतीय परंपराओं और पर्यावरणीय मूल्यों के साथ भी सामंजस्य स्थापित करती है। परिधानों का डिज़ाइन, रंग-संयोजन और कलात्मकता नालंदा विश्वविद्यालय के लोगो में निहित “द नालंदा वे” की मूल भावना से प्रेरित है, जो मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व को दर्शाती है। नालंदा विश्वविद्यालय का प्रतीक चिन्ह, मानव आकृतियों से निर्मित एक वृक्ष, इसी दर्शन को साकार करता है, जो सतत विकास, ज्ञान-साझेदारी और विविधता में एकता का प्रतीक है।

अतिथियों के अंगवस्त्र बिहार के नपुरा और बसवन बिगहा के बुनकरों से विशेष रूप से मंगाए गए हैं। साथ ही, ‘बावन बूटी’ जैसी पारंपरिक बुनाई कला को भी इस पहल में प्रमुखता दी गई है, जो बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है। बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह राजगीर तथा नालंदा विश्वविद्यालय का राष्ट्रपति के रूप में प्रथम दौरा होगा। समारोह के दौरान वे दीक्षांत भाषण देंगी, उपाधियां प्रदान करेंगी तथा मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान करेंगी। वे विश्वविद्यालय के नवनिर्मित 2000 सीटों वाले सभागार “विश्वमित्रालय” का उद्घाटन भी करेंगी।