मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अचानक राज्यसभा जाने के फैसले ने राजनीति के गलियारों में बहस छेड़ दी है। आखिर ऐसी कौन सी वजह थी, जिसकी वजह से उन्हें बिहार छोड़कर दिल्ली जाना पड़ रहा है। इस बीच, महाराष्ट्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने दावा किया है कि अगर नीतीश कुमार भाजपा के साथ नहीं जाते तो आज यह दिन उन्हें नहीं देखना पड़ता।
एनडीए नेताओं का दावा है कि राज्यसभा जाने का फैसला स्वयं नीतीश कुमार का है, वहीं विपक्ष भाजपा पर दबाव का आरोप लगा रहा है।
मुंबई में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि नीतीश कुमार का भाजपा के साथ जाना ही गलत फैसला था, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। बिहार हमेशा समाजवादी विचारों का रहा है। बिहार में इस तरह से कभी नहीं हुआ, अब भाजपा वहां राज करेगी। जदयू कमजोर होती जाएगी।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के लिए अच्छा होता कि वे लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के साथ मिलकर सरकार चलाते, लेकिन उन्होंने भाजपा के साथ जाना की ठीक समझा।
कई राज्यों के राज्यपाल बदलने पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि राज्यपाल किसी दल का नहीं होता है, उसे निष्पक्ष होकर काम करना चाहिए, लेकिन अभी राज्यपाल के जरिए इन्होंने दूसरे राज्यों में, जहां विरोधी दल का राज है, वहां हस्तक्षेप कर रहे हैं और उनके जरिए अपनी सोच, विचार थोपने का काम कर रहे हैं। ये बिल्कुल गलत बात है। राज्यपाल को राज्य की हकीकत को ध्यान में रखकर ही काम करना चाहिए। राज्यपाल के जरिए केंद्र सरकार अपनी राजनीति हर तरफ ला रही है।
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने महाराष्ट्र मंत्रिमंडल से धर्मांतरण विरोधी विधेयक को मंजूरी मिलने पर कहा कि यह बिल्कुल गलत बात है कि किसको किस किससे शादी करनी है, क्या करना है। ये सारी बातें सरकार को तय करने की जरूरत नहीं है। ऐसा है कि युवक और युवती आपस में तय करेंगे, तो शादी हो सकती है। ये धर्मांतरण करने की जरूरत नहीं है। एक बात ध्यान में रखें। बहुत सारी मुस्लिम औरतें भी हिंदुओं से शादी करती हैं। ये गलत बात है कि हिंदू औरतें ही मुसलमानों से शादी करती हैं। बड़े पैमाने पर सिख-हिंदू भी होता है। सरकार का इस तरह से दबाव डालना बहुत गलत है।

