नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित किताब को लेकर संसद में दिए गए बयान पर भाजपा सांसदों ने राहुल गांधी की आलोचना की। भाजपा सांसदों ने कहा कि राहुल गांधी कहीं से कुछ भी लाकर बोलने लगते हैं।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “भारत का डाटा बहुत ही सुदृढ़ कानूनी स्वरूप में है, डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण अधिनियम के नियम हैं। भारत के जितने संवेदनशील क्षेत्र हैं, सबके अपने रोक हैं और इस तरह के आरोप लगाने से पहले चीजों को प्रमाणित करना चाहिए।”
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर कहा, “जो नियम हैं, यह नियम हमारे या स्पीकर ओम बिरला के आने के बाद नहीं बने हैं। यह नियम पहले से हैं। यह नियम जब संविधान की रचना हुई तब से हैं। उन नियमों के आधार पर अगर वे किसी पर आरोप लगाते हैं तो उन्हें प्रमाणित करना होगा। अगर वे जिस पर आरोप लगा रहे हैं, वह सदन का सदस्य है तो उसे नोटिस देना पड़ता है और अगर वह सदन का सदस्य नहीं है तो वे ऐसे आरोप नहीं लगा सकते।”
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के सिर्फ बोलने से प्रमाणित नहीं होता, इससे संबंधित दस्तावेज रखने होते हैं, सबूत रखने होते हैं, सिर्फ बोलने से नहीं होगा। इन्हें प्रमाणिकता और नियम का अर्थ नहीं पता इसलिए कुछ भी बोलते हैं। पहले का इतिहास इन्हें पता नहीं है। ये बस आरोप लगाते हैं। जब कोई आसन पर होता है तो वह किसी पार्टी का नहीं होता है। उन्हें संसदीय भाषा का ज्ञान नहीं है।
भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा, “विपक्ष में वही लोग हैं, जिन्होंने जगदीप धनखड़ का मजाक उड़ाया था। ये लोग अब लोकतंत्र का मजाक उड़ा रहे हैं। इन्हें यही दुख है कि भाजपा जीत क्यों रही है, ये प्रधानमंत्री मोदी को क्यों हरा नहीं पा रहे, देश आर्थिक रूप से इतना मजबूत कैसे होता जा रहा है, केरल और पश्चिम बंगाल का चुनाव इन्हें मुश्किल दिख रहा है और उत्तर प्रदेश तो ये हार चुके हैं, इसलिए सिर्फ यह इनकी पीड़ा है।”
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, “स्पीकर ओम बिरला सदन में आ नहीं रहे। पूरा माहौल अंदर बहुत खराब होता जा रहा है, ये इतना शोर मचा रहे हैं। मंगलवार को जब संसद ठीक चली तो आज कह रहे हैं कि ये 6 लाइनें क्यों? जबकि वंदे मातरम पर चर्चा हो चुकी है, इन्होंने भी इसमें हिस्सा लिया था। ये लोग अपनी हार बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं और एक के बाद एक मुद्दा लाते रहते हैं।”
भाजपा सांसद अरुण गोविल ने कहा, “वंदे मातरम गीत अपने आप में संपूर्ण है, भारत की संस्कृति है, गौरव है, हमारा गर्व है। पहले गलत हुआ था कि उसके छंद काट दिए गए थे, अब सही हुआ है। यह हमारे देश और संस्कृति के लिए बड़ी चीज है। विपक्ष की वजह से दिन-ब-दिन बातचीत और व्यवहार का स्तर गिरता जा रहा है। यह सब पहले कभी नहीं हुआ। यह अच्छा नहीं है।”
भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने कहा, “बहुत ही बेशर्मी है कि महिलाएं अपनी कुर्सी छोड़कर किसी भी कुर्सी पर कैसे आ सकती हैं? वे तो प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास थीं। इस तरह से घेरकर क्या आप हमला करना चाहती थीं? अगर इसी प्रकार पुरुष महिलाओं की कुर्सी को घेर लेते, तो महिलाएं क्या कहतीं? ऐसे लोगों को सदन में आने का हक नहीं है। अगले चुनाव में जनता को इनको सीख देनी चाहिए।”

