दावणगेरे में सियासी घमासान, भाजपा विधायक बी.पी. हरीश ने अखिल भारत वीरशैव महासभा पर उठाए सवाल

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दावणगेरे, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी के विधायक बी.पी. हरीश ने कर्नाटक के वन और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि खंड्रे दावणगेरे दक्षिण से कांग्रेस उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं और लोगों को गुमराह कर रहे हैं। मंगलवार को दावणगेरे में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अखिल भारत वीरशैव महासभा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह संगठन अब अमीर लोगों, कांग्रेस समर्थकों और प्रभावशाली वर्ग के लोगों के नियंत्रण में आ गया है।

हरीश के अनुसार, 6 अप्रैल को हुई वीरशैव समुदाय की एक बैठक में गलत जानकारी फैलाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि महासभा का इस्तेमाल भ्रष्ट कामों और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, ताकि मंत्री पद हासिल किया जा सके।

उन्होंने कहा, “इस संगठन ने गरीब वीरशैवों के लिए कुछ खास नहीं किया है। खंड्रे की हाल की प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका रवैया रक्षात्मक लग रहा था। उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार समर्थ मल्लिकार्जुन के पिता की एक औद्योगिक इकाई का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वहां से बिना साफ किया हुआ कचरा सीधे तुंगभद्रा नदी में डाला जा रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक वन मंत्री के लिए जो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जिम्मेदारी भी संभालते हैं, ऐसे उम्मीदवार का समर्थन करना सही है।

बी.पी. हरीश ने कहा कि इस प्रदूषण के कारण किसानों की जमीन पर राख और धूल जम रही है, जिससे फसलें खराब हो रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब यह मुद्दा विधानसभा में उठाया गया, तब मंत्री ने गलत जानकारी दी।

इसके अलावा, हरीश ने दावणगेरे में शिक्षा क्षेत्र में किए गए योगदान के दावों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों का विकास मुख्य रूप से राजनल्ली और अज्जमपुर जैसे परिवारों के दान और सहयोग से हुआ है।

बी.पी. हरीश ने आरोप लगाया कि चिगाटेरी अस्पताल की स्थापना का श्रेय गलत तरीके से दिवंगत शमनूर शिवशंकरप्पा को दिया जा रहा है, जो समर्थ मल्लिकार्जुन के दादा थे।

हरीश ने कहा कि जहां वीरशैव समुदाय के लोग आमतौर पर शाकाहारी जीवनशैली अपनाते हैं, वहीं शिवशंकरप्पा के परिवार के कुछ सदस्य जानवरों—यहां तक कि काले हिरण—के शिकार में शामिल रहे हैं।

उन्होंने दावा किया, “उनके घर में 15 प्रतिशत लोग भी शाकाहारी नियमों का पालन नहीं करते और सवाल उठाया कि क्या यह समुदाय की परंपराओं के अनुरूप है।

हरीश ने यह भी कहा कि किसी राजनेता को महासभा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं होना चाहिए, क्योंकि इस पद के लिए निष्पक्षता और स्वतंत्रता जरूरी होती है, ताकि समुदाय को सही न्याय मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संगठन में आम वीरशैव लोगों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलता।

दावणगेरे के मेडिकल और इंजीनियरिंग कॉलेजों और बापूजी शैक्षणिक संस्थानों का जिक्र करते हुए भाजपा विधायक ने कहा कि लोग इन संस्थाओं की शुरुआत और बाद में उन पर किसका नियंत्रण रहा, यह अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवशंकरप्पा ने अपने परिवार के भीतर ही सत्ता को केंद्रित करने के लिए अन्य सदस्यों को पीछे कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि जिला स्तर के नेताओं ने संस्थानों में अपने करीबी रिश्तेदारों को भी बाहर कर दिया है।

हरीश ने दावा किया कि मंत्री मल्लिकार्जुन ने परिवार के अन्य हिस्सेदारों को अलग करके साझा संपत्तियों पर अपना नियंत्रण कर लिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र की बड़ी संस्थाएं किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कई परिवारों के मिलकर किए गए प्रयासों से बनी हैं।

हरीश ने इलाके में एक डिस्टिलरी (शराब फैक्ट्री) की स्थापना की भी आलोचना की। उनका कहना है कि इससे गरीब महिलाओं पर बुरा असर पड़ा है, जबकि खंड्रे इसे अपनी उपलब्धि बता रहे हैं।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला भाजपा अध्यक्ष राजशेखर वीरेश और अन्य नेता विजेंद्र, डी.टी. अविनाश, पी.एस. और विश्वास भी मौजूद थे।