सीएक्यूएम ने 2026 में पराली जलाने से रोकने के लिए राज्यों को जारी किए निर्देश

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नई दिल्ली, 16 फरवरी (आईएएनएस)। हवा की गुणवत्ता को सुधारने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने एक कानूनी निर्देश जारी किया है। इसके तहत पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को 2026 की फसल कटाई सीजन में गेहूं की पराली जलाने को रोकने और समाप्त करने के लिए राज्य स्तर की कार्य योजनाओं को समयबद्ध और समन्वित तरीके से लागू करना अनिवार्य किया गया है।

आयोग ने कहा कि कृषि अवशेष जलाना न केवल स्थानीय क्षेत्रों में बल्कि एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है, इसलिए संरचित मौसमी तैयारियों की आवश्यकता है। इसरो/एआरआई द्वारा विकसित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार, 1 अप्रैल से 31 मई 2025 के बीच गेहूं कटाई सीजन में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में आग लगने की कई घटनाएं दर्ज हुई हैं।

आयोग ने पहले राज्यों को कृषि अवशेष जलाने को नियंत्रित/समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा दी थी और कहा था कि वे इसे आधार बनाकर राज्य-विशेष कार्य योजनाएं तैयार करें। 22 दिसंबर 2025 को आयोग की 26वीं बैठक में और उसी दिन पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ आयोजित बैठक में, इन राज्यों ने अपनी कार्य योजनाओं को प्रस्तुत किया और आयोग ने उन्हें इसे अपडेट और सुधारने की सलाह दी।

आयोग ने संबंधित राज्यों को गेहूं की पराली जलाने को रोकने और वैकल्पिक उपाय सुनिश्चित करने के लिए अपनी कार्य योजनाओं को लागू करने का आदेश दिया। आयोग ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिए हैं कि राज्य कार्य योजना को पूरी तरह लागू करे, ताकि गेहूं की पराली जलाना रोका और नियंत्रित किया जा सके।

इसके साथ ही प्रत्येक गांव में हर खेत का नक्शा तैयार किया जाए और प्रस्तावित प्रबंधन पद्धतियों (फसल विविधीकरण, इन-सिटू या एक्स-सिटू प्रबंधन, चारा आदि) के अनुसार वर्गीकरण किया जाए। प्रत्येक जिले में किसानों के लिए जिम्मेदार अधिकारी (नोडल ऑफिसर) नियुक्त किया जाए। प्रत्येक अधिकारी अधिकतम 100 किसानों की मॉनिटरिंग करेगा।

मोबाइल ऐप के माध्यम से किसानों को सीआरएम मशीनों का समय पर और बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाए। छोटे और सीमांत किसानों के लिए सीआरएम मशीनें मुफ्त उपलब्ध कराई जाएं। गेहूं की पराली रखने के लिए पर्याप्त और उचित भंडारण की सुविधा प्रदान की जाए। एक्स-सिटू उपयोग के लिए (जैसे चारा आदि) पराली की निरंतर आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करना और हर जिले के लिए जिला स्तर की योजना बनाने का भी निर्देश दिया गया है।

जिला/ब्लॉक स्तर पर “पराली सुरक्षा बल” गठित करना, जिसमें पुलिस, कृषि विभाग, प्रशासनिक अधिकारी और अन्य संबंधित विभाग शामिल हों, ताकि खुले में पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी और रोकथाम की जा सके।

इसके साथ ही देर शाम के समय निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाना, पर्यावरणीय मुआवजे की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करना, किसानों में जागरूकता बढ़ाने और पराली जलाने के नुकसान तथा बेहतर प्रथाओं के बारे में जानकारी देने के लिए व्यापक कार्यक्रम आयोजित करने की सलाह दी गई है।

इसके अलावा, दिल्ली और राजस्थान सरकार को भी अगले कटाई सीजन में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी संभव प्रयास करने की सलाह दी गई है। राज्यों को आयोग को लगातार निगरानी और आवश्यक कार्रवाई के लिए मासिक रिपोर्ट भेजनी होगी।