लखनऊ, 10 मार्च (आईएएनएस)। सीबीआई की विशेष अदालत, लखनऊ, ने मंगलवार को बैंक धोखाधड़ी मामले में चार लोगों (रामजी मिश्रा, श्यामजी मिश्रा, अखिलेश कुमार मिश्रा, और मनीषी पांडे) और दो निजी फर्मों, मेसर्स मनीषी एंटरप्राइजेज, वाराणसी, और मेसर्स मिर्जापुर कार्पेट्स कंपनी लिमिटेड, को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
चारों आरोपियों को 8 साल के कठोर कारावास और प्रत्येक पर 70 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है। अदालत ने मेसर्स मनीषी एंटरप्राइजेज, वाराणसी और मेसर्स मिर्जापुर कार्पेट्स कंपनी लिमिटेड (संयुक्त रूप से) पर 2 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है।
जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने 17 मार्च 2004 को 7 आरोपियों और 2 फर्मों के खिलाफ जाली बिल ऑफ लैडिंग का उपयोग करके बैंक को 6.75 करोड़ रुपए का गलत नुकसान पहुंचाने के आरोप में संयुक्त आरोपपत्र दाखिल किया। आरोपियों में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मिर्जापुर के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एसएन वर्मा, यदु नाथ दुबे, पंकज कुमार तिवारी, मनीषी पांडे, रामजी मिश्रा, श्यामजी मिश्रा, अखिलेश कुमार मिश्रा, मेसर्स मनीषी एंटरप्राइजेज, वाराणसी (अपने मुख्य कार्यकारी साझेदार के माध्यम से) और मेसर्स मिर्जापुर कार्पेट्स कंपनी लिमिटेड, मिर्जापुर (अपने प्रबंध निदेशक के माध्यम से) शामिल हैं।
न्यायालय ने मुकदमे की सुनवाई के बाद अभियुक्तों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
आरोपी एसएन वर्मा उस समय सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, मिर्जापुर के शाखा प्रबंधक थे, और यदुनाथ दुबे (निजी व्यक्ति) को आपराधिक साजिश के सबूत न मिलने के आधार पर सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। चिकित्सा कारणों से अभियुक्त पंकज कुमार तिवारी के मामले को न्यायालय द्वारा अलग कर दिया गया है।

