बीजिंग, 22 फरवरी (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने ‘सुरक्षा परिषद की सीटों के उचित बंटवारे और सदस्यों की संख्या बढ़ाने के मुद्दे’ और सुरक्षा परिषद से जुड़े दूसरे मामलों पर अंतर-सरकारी बातचीत की।
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने अपनी आखिरी बात में दोहराया कि जापान अपने ऐतिहासिक आक्रामक कृत्यों पर पश्चाताप करने से इनकार करता है, युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय शासन को खुलेआम रौंद रहा है, दूसरे देशों की संप्रभुता में दखल दे रहा है और इलाके की शांति और स्थिरता के लिए नए खतरे पैदा कर रहा है। ऐसा देश स्थायी सदस्यता मांगने के लायक ही नहीं है।
फू थ्सोंग ने सुरक्षा परिषद सुधार के बारे में तीन बातों पर भी जोर दिया: पहला, सुरक्षा परिषद शक्तिशाली और समृद्ध देशों का ‘क्लब’ नहीं बन सकती। सुधार से सिर्फ बहुत कम देशों को ही फायदा नहीं होना चाहिए।
दूसरा, विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व और आवाज को सच में बढ़ाया जाना चाहिए, जिससे स्वतंत्र विदेश नीतियों वाले छोटे और मध्यम आकार के देशों को सुरक्षा परिषद में भागीदारी का मौका मिल सके। खास तौर पर, अफ्रीका के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को ठीक किया जाना चाहिए, और अफ्रीकी देशों की मांगों को प्राथमिकता देते हुए खास इंतजाम किए जाने चाहिए।
तीसरा, सुधार को केवल वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों तक सीमित नहीं किया जा सकता। इसे एक रणनीतिक दृष्टि और लंबे समय के नजरिए से प्लान किया जाना चाहिए।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

