नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही सब परेशान हो जाते हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि बढ़ते कोलेस्ट्रॉल से हार्ट अटैक आना पक्का है, लेकिन ऐसा नहीं है।
हमारे शरीर के लिए कोलेस्ट्रॉल बहुत जरूरी है, और शरीर खुद कोलेस्ट्रॉल का उत्पादन करता है। अगर कोलेस्ट्रॉल एक नियमित सीमा से बाहर बढ़ने लगता है, तो यह कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि खराब जीवनशैली का संकेत है। कोलेस्ट्रॉल को आसानी से दिनचर्या में बदलाव करके नियंत्रित किया जा सकता है।
पहले सरल भाषा में समझते हैं कि कोलेस्ट्रॉल क्या है। कोलेस्ट्रॉल एक तरह का चिपचिपा और सफेद रंग का वसा होता है, जो कोशिकाओं और धमनियों में पाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के लिए भी आवश्यक है, क्योंकि बिना इसके विटामिन के अवशोषण पर प्रभाव पड़ता है और यह हॉर्मोन बनाने में भी सहायक है। हमारे शरीर में जब वसा (कोलेस्ट्रॉल) की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो उसे बैड कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। यह वसा धमनियों और कोशिकाओं पर दबाव बनाती है और दिल के काम में बाधा उत्पन्न करती है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
आयुर्वेद में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के कई उपाय बताए गए हैं। पहला है लहसुन का सेवन। लहसुन में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता होती है। इसके लिए सुबह खाली पेट लहसुन की दो कलियों को भूनकर खाने से आराम मिलेगा। इसे गुनगुने पानी के साथ भी ले सकते हैं। दूसरा उपाय है मेथी दाना। मेथी दाने में फाइबर उच्च मात्रा में पाया जाता है। अगर सुबह खाली पेट मेथी दाना खाया जाए या फिर उसका पानी पिया जाए तो कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि, नियमित रूप से नहीं, बल्कि 1 दिन छोड़कर पानी का सेवन करें।
तीसरा उपाय है अर्जुन की छाल का काढा। अर्जुन की छाल को हृदय रोगों का काल माना गया है। आयुर्वेद में हृदय रोगों के संबंध में अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने की सलाह दी जाती है। ये बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम कर अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। चौथा उपाय है धनिया पानी।
धनिया पानी लिवर को डिटॉक्स करने का काम करता है। अगर लीवर सही तरीके से काम करता है तो अधिक मात्रा में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता। कोलेस्ट्रॉल को बनाने का काम लिवर ही करता है। इसके साथ ही अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ा है तो चिकनाई वाले खाद्य पदार्थ और जंक फूड से परहेज करें।

