नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सदस्य प्रियंका चतुर्वेदी ने कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से चुनाव आयोग काम कर रहा है, उससे ऐसा लगता है कि वह भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे के अनुसार कार्रवाई कर रहा है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “चुनाव आयोग जिस तरीके से काम कर रहा है और फैसले ले रहा है, उससे साफ दिखता है कि वह भाजपा के एजेंडे का पालन कर रहा है। पहले भी यही बात ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स को लेकर कही जाती रही है। जब भी विपक्ष ने सवाल उठाए, तो उनके घरों पर छापे पड़ते थे या उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता था, ताकि उनकी आवाज दबाई जा सके।”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत उन मतदाताओं को हटाने की कोशिश की जा रही है जो विपक्ष को वोट करते हैं। जो वोटर्स विपक्ष को वोट देते हैं, उन्हें एसआईआर के तहत हटाने का काम किया जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उनका जवाब नहीं मिल रहा है। और चुनाव आयोग की तरफ से जो जवाब आते हैं, उससे लगता है कि वह भाजपा मुख्यालय का ही बयान पढ़ रहा है।
वहीं, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और रूसी तेल खरीद को लेकर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से पूछा गया कि क्या भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करते समय यह कहा था कि वह रूसी तेल नहीं खरीदेगा, तो उनका जवाब चौंकाने वाला था।
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “पीयूष गोयल ने जवाब दिया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता और इसके लिए विदेश मंत्रालय से पूछा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह न तो तेल खरीदते हैं और न बेचते हैं और तेल उनके विभाग के अंतर्गत नहीं आता। पहले उन्हें यह तय कर लेना चाहिए कि यह उनके कार्यक्षेत्र में आता है या नहीं।”
इसके अलावा, यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के मुद्दे पर भी उन्होंने सावधानी बरतने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसे लागू करने से पहले सभी पक्षों और समुदायों से चर्चा करना जरूरी है।
उन्होंने कहा, “यूसीसी लागू करने से पहले कई हितधारकों से बातचीत करना जरूरी है और हर वर्ग को साथ लेकर चलना चाहिए। यूसीसी के नाम पर वैसा ध्रुवीकरण नहीं होना चाहिए जैसा यूजीसी गाइडलाइंस के मामले में कैंपसों में देखने को मिला।”
इसी दौरान उन्होंने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स के इस्तीफे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “इंडियन एयरलाइंस की सबसे बड़ी विफलता तब सामने आई थी जब हमारी सरकार सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को सही तरीके से लागू नहीं कर पाई। जिस तरह से इंडिगो की फ्लाइट्स कैंसिल हुईं और पूरी एयर इंडस्ट्री ठप हो गई थी, इन सबको देखते हुए अगर उन्होंने इस्तीफा दिया है तो मैं इसका स्वागत करती हूं।”
बता दें कि इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने 10 मार्च को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा दिसंबर 2025 में हुए बड़े ऑपरेशनल संकट के बाद आया है, जब एयरलाइन को करीब 4,500 फ्लाइट्स रद्द करनी पड़ी थीं, जिससे लाखों यात्री प्रभावित हुए और सैकड़ों हजार लोग एयरपोर्ट पर फंस गए थे।

