कॉस्मेटिक सर्जरी सिर्फ अभिनेत्रियों तक सीमित नहीं, आम युवतियों में बढ़ता चलन चिंताजनक : संदीपा धर

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नई दिल्ली, 3 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेत्री संदीपा धर की हालिया रिलीज फिल्म ‘दो दीवाने सहर में’ सुर्खियां बटोर रही है। इस फिल्म के जरिए लोगों को परफेक्शन की दौड़ छोड़कर खुद को स्वीकार करने का संदेश दिया गया है।

अभिनेत्री संदीपा धर ने हाल ही में आईएएनएस से खास बातचीत में महिलाओं पर बढ़ते ब्यूटी प्रेशर के बारे में गहरी बातें कही। उन्होंने कहा कि आजकल कॉस्मेटिक प्रोसीजर सिर्फ अभिनेत्रियों तक ही सीमित नहीं है। इसे आजकल आम युवतियां भी करवा रही हैं। उन्होंने कहा, पहले लोग सोचते थे कि सिर्फ फिल्म स्टार ही ऐसा करते हैं, लेकिन अब यह आम बात हो गई है। हर महिला खुद को अपनी कहानी की हीरोइन जैसा महसूस करना चाहती है, लेकिन अगर यह खुद को कम समझने से शुरू होता है तो यह खतरनाक रास्ता बन जाता है।

संदीपा ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए कहा कि हम लोग एक ऐसे ब्यूटी स्टैंडर्ड में चलते जा रहे हैं, जो हकीकत से बहुत दूर है। इससे लोग खुद से ही संतुष्ट नहीं होते हैं। इसे बदलना जरूरी है और बदलाव तब आएगा जब परिवार व दोस्त हमें वैसा ही अपनाने के लिए कहें जैसा हम हैं।

संदीपा ने तुलना को खुशी का सबसे बड़ा दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि तुलना सच में खुशी चुरा लेती है। अगर हम अपनी जिंदगी को हमेशा दूसरों से जोड़कर देखेंगे, तो कभी खुश नहीं रह सकते। बचपन में माता-पिता या टीचर अक्सर बच्चों की तुलना करते थे। पढ़ाई, व्यवहार या दिखावे में। इससे गहरी असुरक्षा और ट्रॉमा पैदा होता है क्योंकि हर इंसान अलग होता है।

उन्होंने कहा कि जब हम बड़े हुए तो सोशल मीडिया पर तुलना और भी ज्यादा बढ़ गई। उन्होंने कहा कि लोग दूसरों की सफलता देखकर सोचते हैं कि वे पीछे क्यों हैं। हर किसी का सफर और समय अलग होता है। कभी-कभी जो चीज हम चाहते हैं, वह हमारे लिए सही भी नहीं होती। हमें खुद को वैसे ही स्वीकार करना चाहिए और समझना चाहिए कि हम पर्याप्त हैं।”

संदीपा ने सफलता को लेकर कहा, “मेरे लिए सफलता का मतलब हमेशा मन की शांति है। फिल्में आती-जाती रहेंगी। कुछ हिट होंगी, तो कुछ फ्लॉप भी, लेकिन मुझे हर दिन खुद के साथ जीना है। मेरा असली लक्ष्य इंसान के रूप में आगे बढ़ना और जिंदगी का मकसद समझना है। बाहरी तारीफ से ज्यादा यह महत्वपूर्ण है।”