नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली के प्रीत सिरोही ने अवैध कब्जे को लेकर केस दायर किया था। खबरों के अनुसार, उन्हें कोर्ट से फटकार लगी है, लेकिन प्रीत सिरोही का कहना है कि उनकी पिटीशन में तकनीकी समस्या थी, इसलिए उन्होंने उसे वापस ले लिया है, लेकिन वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
आईएएनएस से बातचीत में प्रीत सिरोही ने मीडिया रिपोर्टों को झूठा बताया और कहा कि याचिका में तकनीकी त्रुटि थी और उन्होंने भ्रामक आरोपों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने उनके बयान/सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि सार्वजनिक मंच पर बोलते समय जिम्मेदारी और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना तथ्यों के आरोप या भड़काऊ टिप्पणी करे।
आमतौर पर ऐसी फटकार तब दी जाती है, जब अदालत को लगता है कि किसी के बयान से न्यायिक प्रक्रिया, सार्वजनिक व्यवस्था या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, प्रीत सिरोही का कहना है कि यह सब झूठी खबरें हैं। मैं आदेश पढ़कर सुना सकता हूं। हमारी याचिका में कोई तकनीकी खामी थी। तीन दिन बाद, बुधवार को उस पर सुनवाई है।
उन्होंने कहा कि झूठी खबरें छापी जा रही हैं। जो दिल में आता है, वही प्रकाशित कर देते हैं। ऐसे आरोपों से मैं घबराने वाला नहीं हूं। जो कुछ भी कहा गया है, उसके विरुद्ध मैं स्वयं मुकदमा दायर करूंगा। 100 में से 99 नहीं हो सकते, लेकिन 100 में से 101 जरूर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि मैं भाषणबाजी करने नहीं आया हूं और न ही मैं यहां कोई नेता बनने आया हूं। मेरी लड़ाई उन लोगों से है, जिन्होंने मेरी मातृभूमि पर कब्जा किया है और उन्हें खाली करना ही पड़ेगा। यदि वे कानून की आड़ में मेरे देश पर कब्जा करने की कोशिश करेंगे, तो क्या मैं देखता रहूंगा? मैं शांति से बैठने वाला नहीं हूं।

