रांची, 9 मार्च (आईएएनएस)। अगर कोई फार्मा कंपनी सरकार की ओर से निर्धारित कीमत से अधिक दर पर दवा बेच रही है, तो इस पर अंकुश के लिए आम उपभोक्ताओं के पास एक ‘सशक्त हथियार’ है। भारत सरकार की नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने ‘फार्मा सही दाम’ मोबाइल ऐप लॉन्च किया है, जिसे कोई भी नागरिक अपने फोन में इंस्टॉल कर दवाओं की सही कीमत की तुरंत जांच कर सकता है।
केंद्र सरकार की इस इस मुहिम को झारखंड में धरातल पर प्रभावी रूप से उतारने के लिए झारखंड स्टेट फार्मास्युटिकल प्राइस मॉनिटरिंग एंड रिसोर्स यूनिट (जेपीएमआरयू) ने सक्रियता बढ़ा दी है।
जेपीएमआरयू की रिपोर्ट के अनुसार, मार्केट सर्वे के दौरान ऐसी लगभग 600 दवाइयां चिन्हित की गई हैं, जिनमें ओवर प्राइसिंग (निर्धारित से अधिक कीमत) का मामला पाया गया है। इन सभी मामलों की रिपोर्ट एनपीपीए को भेज दी गई है, ताकि संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सोमवार को रांची के आईपीएच सभागार में “द ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 एवं फार्मा सही दाम ऐप” विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय जागरूकता कार्यशाला के दौरान इसकी जानकारी दी गई।
कार्यशाला में उपस्थित स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि फार्मेसी के छात्रों और केमिस्ट-ड्रगिस्ट संगठनों के सहयोग से इस अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा।
एनपीपीए के डायरेक्टर कुमार अमन भारती ने दवाओं के मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को समझाते हुए लोगों से अपील की कि वे जागरूकता के लिए तकनीक का सहारा लें। औषधि निदेशक ऋतु सहाय ने बताया कि भारत सरकार के नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी दवा कंपनी सरकार की ओर से निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर दवा नहीं बेच सकती। नियमों का उल्लंघन कर ज्यादा पैसे वसूलने वाली कंपनियों से न केवल अतिरिक्त राशि वसूली जाएगी, बल्कि उन पर सख्त कार्रवाई भी होगी।

