सौरभ भारद्वाज ने सरकार पर दिल्ली को कर्जदार बनाने का लगाया आरोप

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नई दिल्ली, 7 मार्च (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष और नेता सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि केवल एक साल के भीतर राजधानी को कर्जदार बना दिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के इतिहास में पहली बार सरकार को खुले बाजार से 1000 करोड़ रुपए का कर्ज लेना पड़ रहा है।

शनिवार को सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पिछले साल दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक लाख करोड़ रुपए का बजट पेशकर बड़ी उपलब्धि बताई थी और उसकी खूब वाहवाही भी लूटी थी, लेकिन अब यह बजट केवल “हवा का गुब्बारा” साबित हुआ है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतना बड़ा बजट पेश किया गया था तो अब सरकार को कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है और वह पैसा आखिर गया कहां। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद पूरे दिल्ली में बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर एक लाख करोड़ रुपये के बजट का प्रचार किया गया। उस समय यह नहीं बताया गया कि इतना पैसा आएगा कहां से।

उन्होंने आरोप लगाया कि अब जानकारी सामने आ रही है कि दिल्ली सरकार ने चुपचाप रिजर्व बैंक से संपर्क कर खुले बाजार से एक हजार करोड़ रुपए उधार लेने की अनुमति मांगी है।

उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान दिल्ली में हमेशा राजस्व अधिशेष बजट पेश किया जाता था और कभी भी खुले बाजार से कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन भाजपा सरकार ने एक साल के भीतर ही वित्तीय स्थिति बिगाड़ दी है।

सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले एक साल में भाजपा सरकार ने कोई नया विकास कार्य शुरू नहीं किया है। उनके अनुसार, सरकार केवल आम आदमी पार्टी के समय शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स का नाम बदलकर उन्हें अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि पहले से मौजूद डिस्पेंसरी और मोहल्ला क्लीनिकों को केवल रंग-रोगन कर “आरोग्य मंदिर” का नाम दे दिया गया है। इसी तरह केजरीवाल सरकार के समय लाई गई बसों पर नया पेंट कर उन्हें “देवी बस” बताया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा बनाए गए डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर “स्कूल ऑफ एक्सीलेंस” के बोर्ड हटाकर उनकी जगह “सीएम श्री स्कूल” का बोर्ड लगा दिया गया है और दावा किया जा रहा है कि 73 नए स्कूल बनाए गए हैं।

आप नेता ने कहा कि न कोई नया टेंडर जारी हुआ, न कोई निर्माण कार्य हुआ और न ही एक ईंट तक लगी, फिर भी नए स्कूल बनाने का दावा किया जा रहा है। सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली में पहले 540 मोहल्ला क्लीनिक थे, जिनमें से लगभग 450 बंद कर दिए गए हैं और केवल करीब 100 ही चल रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि एक लाख करोड़ रुपए के बजट का पैसा कहां खर्च हुआ और अब कर्ज लेने की नौबत क्यों आ गई। उन्होंने मांग की कि दिल्ली सरकार अपनी वित्तीय स्थिति और बजट खर्च का पूरा हिसाब जनता के सामने रखे।