नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। धार भोजशाला विवाद मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी और यह स्पष्ट किया कि अंतिम फैसला और वीडियोग्राफी की समीक्षा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा।
दरअसल, मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा इसलिए खटखटाया क्योंकि उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किए गए सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी के फुटेज नहीं मिले थे। मुस्लिम पक्ष का कहना था कि उन्हें एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्तियां दर्ज कराने का पर्याप्त मौका नहीं मिला और हाई कोर्ट में 11 मार्च को उनके आवेदन पर 16 मार्च को सुनवाई नहीं हुई। इसलिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मदद मांगी।
मुस्लिम पक्ष की तरफ से एडवोकेट सलमान खुर्शीद ने कहा कि हमने भोजशाला में किए गए सर्वेक्षण पर कुछ ऑब्जेक्शन उठाए हैं। इसके लिए सर्वे की वीडियोग्राफी और कलर पिक्चर्स उपलब्ध कराए जाएं ताकि हम अपनी आपत्तियां सही तरीके से दर्ज कर सकें।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिका पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया और उन्हें वापस हाईकोर्ट जाने के लिए कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी पक्ष को अगर कोई आपत्ति है तो वह अपनी बात हाईकोर्ट के सामने रखे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस विवादित स्थल की वीडियोग्राफी से जुड़ी सभी आपत्तियों पर अंतिम निर्णय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ही करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उन्हें इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि हाईकोर्ट प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत वीडियोग्राफी का परीक्षण करेगा और सभी आपत्तियों पर निष्पक्ष फैसला करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को यही सलाह दी कि वे अपनी आपत्तियां सीधे हाईकोर्ट में उठाएं और वहां सुनवाई का इंतजार करें।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपने 16 मार्च के आदेश में यह भी कहा था कि विवादित जगह का स्वयं निरीक्षण किया जाएगा और इसके बाद नियमित सुनवाई शुरू होगी। अब इस मामले में सुनवाई 2 अप्रैल से हाईकोर्ट में शुरू होगी।


