डीएसएससी के 81वें स्टाफ कोर्स का दीक्षांत समारोह संपन्न, रक्षा सचिव ने सैन्य अधिकारियों को दीं शुभकामनाएं

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चेन्नई, 11 अप्रैल (आईएएनएस)। तमिलनाडु में नीलगिरि जिले के वेलिंगटन स्थित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) में शुक्रवार को 81वें स्टाफ कोर्स का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अधिकारियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्हें भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं।

दीक्षांत समारोह के दौरान रक्षा सचिव ने कॉलेज में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सराहना की और विशेष रूप से ‘जॉइंटमैनशिप’ को बढ़ावा देने वाली पहलों को महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि यह संस्थान भविष्य के सैन्य नेतृत्व को तैयार करने में अहम योगदान दे रहा है। उन्होंने मेधावी अधिकारियों को पदक प्रदान किए और स्टाफ कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने वाले सभी अधिकारियों को बधाई दी। उन्होंने उनके समर्पण, अनुशासन और कठिन परिश्रम की भी सराहना की।

रक्षा सचिव ने छात्र अधिकारियों के साथ संवाद भी किया, जिनमें 44 अंतर्राष्ट्रीय अधिकारी शामिल थे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम भारत और अन्य देशों के बीच सैन्य सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय अधिकारियों के योगदान की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस समारोह में कई मित्र देशों के रक्षा अताशे भी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

बता दें कि 1948 में स्थापित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज एक प्रमुख त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान है जो भारतीय रक्षा बलों के चयनित मध्यम-स्तरीय अधिकारियों के साथ-साथ मित्र देशों के अधिकारियों को पेशेवर शिक्षा प्रदान करता है। इस संस्थान का उद्देश्य उच्च जिम्मेदारियों के लिए उनकी क्षमताओं को बढ़ाना है। पिछले कुछ वर्षों में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में 19,500 से अधिक भारतीय अधिकारियों और 2,000 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें से कई ने बाद में सरकारों और सेनाओं में प्रमुख नेतृत्व पदों पर कार्य किया है।