लखनऊ, 28 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में नवाचार, स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। इसी दिशा में राज्य सरकार द्वारा 1000 करोड़ रुपए का यूपी स्टार्टअप फंड गठित किया गया है, जिसका उद्देश्य नए विचारों को व्यवसाय में बदलने में सहायता करना है।
इस फंड के माध्यम से स्टार्टअप को शुरुआती और विस्तार के चरण में वित्तीय सहारा मिल रहा है। अब तक इस फंड से 325 करोड़ रुपए की राशि स्टार्टअप को सीधे सहायता के लिए स्वीकृत की जा चुकी है, जिससे प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति को मजबूती मिली है।
दरअसल, प्रदेश में वर्तमान में 19 हजार से अधिक स्टार्टअप को केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईटी) से मान्यता प्राप्त है। इनमें 9600 से अधिक महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप शामिल हैं, जो यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश में महिलाएं भी आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
राज्य सरकार की “स्टार्ट इन यूपी” योजना प्रदेश के युवाओं और नए उद्यमियों के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरी है। इस योजना के तहत अब तक 3000 से अधिक स्टार्टअप को मान्यता दी जा चुकी है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। इनमें 900 से अधिक स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित हैं, जो महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इसके साथ ही 2100 से अधिक स्टार्टअप को इनक्यूबेशन सहायता दी गई है, जिससे उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, मेंटरशिप और बिजनेस सपोर्ट मिल सका है। इनक्यूबेशन के जरिए स्टार्टअप को सही दिशा में आगे बढ़ने और असफलता के जोखिम को कम करने में मदद मिल रही है।
नए स्टार्टअप्स को शुरुआत के समय सबसे ज्यादा जरूरत पूंजी और बाजार तक पहुंच की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योगी सरकार द्वारा सीड कैपिटल और मार्केटिंग सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 376 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन स्टार्टअप के लिए 26.43 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है, जिससे वे अपने उत्पाद और सेवाओं का प्रचार-प्रसार कर सकें और बाजार में अपनी पहचान बना सकें।
किसी भी नए विचार को सफल व्यवसाय में बदलने के लिए प्रोटोटाइप विकास एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने प्रोटोटाइप विकास के लिए विशेष सहायता दी है। इसके तहत अब तक 74 आवेदन स्वीकृत किए जा चुके हैं और 3.55 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 76 मान्यता प्राप्त इनक्यूबेटर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जो स्टार्टअप को तकनीकी, प्रबंधन और रणनीतिक सहयोग प्रदान कर रहे हैं। इन इनक्यूबेटर्स को अब तक 14.80 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है, जिससे स्टार्टअप के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो रहा है।
स्टार्टअप शुरू करने के शुरुआती दौर में आर्थिक चुनौतियां सबसे बड़ी समस्या होती हैं। इसे कम करने के लिए योगी सरकार ने भरण-पोषण भत्ता और इंसेंटिव योजनाएं लागू की हैं। इसके तहत अब तक 115 भरण-पोषण भत्ता आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके लिए 2.46 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की गई है। इनमें से 97 लाख रुपए की राशि का भुगतान भी किया जा चुका है, जिससे उद्यमियों को शुरुआती खर्चों में राहत मिली है। इसके अलावा 566 इंसेंटिव आवेदन स्वीकृत किए गए हैं, जिनके अंतर्गत 32 करोड़ की राशि मंजूर की गई है। इन योजनाओं से स्टार्टअप का शुरुआती जोखिम काफी हद तक कम हुआ है।
प्रदेश में तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को मंजूरी दी है। ये केंद्र स्टार्टअप्स को आधुनिक तकनीक, शोध सुविधाएं और विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहे हैं। अब तक इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए 27.18 करोड़ रुपए की राशि खर्च की जा चुकी है। यूपी स्टार्टअप फंड के माध्यम से अब तक 48 यूपी आधारित स्टार्टअप को सीधे फंडिंग प्रदान की जा चुकी है। इससे न केवल नए व्यवसाय स्थापित हो रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

