नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी हमले के बीच फर्जी खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। एमईए ने बहरीन से जुड़ी एक खबर का फैक्ट चेक किया है, जिसमें ये कहा गया कि बहरीन ने एक भारतीय जासूस को पकड़ा और उस पर मोसाद के लिए काम करने का देशद्रोह का आरोप लगाया।
एमईए फैक्ट चेक ने कहा कि यह फेक न्यूज है। कृपया सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे और बेबुनियाद दावों से सावधान रहें।
फर्जी खबर में कहा गया, “बहरीन ने एक भारतीय जासूस को पकड़ा और उस पर मोसाद के लिए काम करने का देशद्रोह का आरोप लगाया। सभी भारतीयों पर तुरंत बैन लगाया जाए और उन्हें देश निकाला दिया जाए। भारतीयों ने इजरायल को चुना, उन्हें रहने दो। मेरा मतलब है, सच में बड़े पैमाने पर बिना सोचे-समझे देश निकाला। यह मजाकिया है कि उन्हें एक मिनट भी रुकने दिया गया। यह खाड़ी के शासकों का देशद्रोह है।”
इसके अलावा विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भी एक डीपफेक वीडियो सामने आया, लेकिन पीआईबी ने इसका फैक्ट चेक किया। पीआईबी ने वीडियो को फर्जी बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा अकाउंट्स विदेश मंत्री डॉ एस. जयशंकर का एक डिजिटली छेड़छाड़ किया गया वीडियो साझा कर रहे हैं, जिसमें झूठे दावे किए गए हैं कि उन्होंने कहा कि भारत मुस्लिम देशों द्वारा इजरायल को परेशान किए जाने को बर्दाश्त नहीं करेगा और इजरायल ने हाल ही में भारत के कहने पर अफगान तालिबान को 3 बिलियन डॉलर दिए हैं। सावधान यह एक एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो है जिसे लोगों को गुमराह करने के लिए शेयर किया गया है।”
डीपफेक वीडियो में विदेश मंत्री के वीडियो के साथ छेड़छाड़ करने के बाद ये कहते हुए सुना जा सकता है, “जिन देशों को दबाया जाता है, भारत हमेशा उन देशों के साथ खड़ा रहा है। इजरायल को सबसे ज्यादा दबाया गया है। ईरान और अन्य मुस्लिम देशों ने उसे लगातार परेशान किया है। भारत चुपचाप सभी मुस्लिम देशों को इजरायल को परेशान करते हुए नहीं देखेगा। हम गर्व से इजरायल के साथ खड़े हैं। जो कोई भी इसके उलट सोचता है, उसका पाकिस्तान जाने का स्वागत है, क्योंकि भारत इजरायल के लिए किसी भी तरह की नफरत को कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। इजरायल ने हाल ही में भारत के कहने पर अफगान तालिबान को तीन बिलियन डॉलर की मदद दी है। हम उनका यह एहसान कभी नहीं चुका सकते। हमारा अगला टारगेट अब पाकिस्तान है।”
ओरिजिनल वीडियो में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर कहते हैं, “विदेश मंत्रालय ने इराक की गैर-जरूरी यात्रा से क्यों परहेज किया है? जो लोग पहले से वहां रह रहे हैं, उनसे दूतावास में रजिस्टर करने, सही प्रक्रिया अपनाने और दूतावास की वेबसाइट और सोशल मीडिया पर नजर रखने की अपील की गई है।”

