फेमा केस में कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे को समन भेजने वाले ईडी ऑफिसर का ट्रांसफर

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चंडीगढ़, 13 फरवरी (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2016 के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) मामले में पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री और भाजपा नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह तथा उनके बेटे रणिंदर सिंह को समन जारी किए थे। समन जारी होने के दो दिन बाद ही जालंधर स्थित ईडी के जोनल ऑफिस के प्रमुख अधिकारी का तबादला कर दिया गया है।

केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आदेश के अनुसार, 2009 बैच के इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) अधिकारी रवि तिवारी, जो सितंबर 2023 से जालंधर में तैनात थे, अब चेन्नई स्थानांतरित कर दिए गए हैं। उनकी जगह दिनेश पचौरी को जालंधर पोस्टिंग दी गई है।

इस मामले में कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे पर स्विस बैंक अकाउंट सहित कुछ विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी होने का आरोप है। ईडी ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को शुक्रवार (13 फरवरी) को जालंधर ऑफिस में पेश होने के लिए कहा था, जबकि उनके बेटे रणिंदर सिंह को गुरुवार (12 फरवरी) को बुलाया गया था।

रणिंदर सिंह ने अपने पिता की सेहत का हवाला देते हुए समन से छूट मांगी थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह की मोहाली के एक निजी अस्पताल में घुटने की रिप्लेसमेंट सर्जरी हुई है और वे अभी अस्पताल में भर्ती हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी मेडिकल आधार पर सुनवाई टालने की अपील की थी।

भाजपा के पंजाब प्रभारी और स्टेट एक्टिंग प्रेसिडेंट अश्विनी शर्मा ने शुक्रवार को अस्पताल जाकर कैप्टन अमरिंदर सिंह का हालचाल जाना। ईडी ने इससे पहले 23 अक्टूबर 2020 को भी रणिंदर सिंह को जालंधर ऑफिस में बुलाया था। उस समय स्विट्जरलैंड में फंड ट्रांसफर और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में एक ट्रस्ट बनाने के बारे में पूछताछ की गई थी। यह मामला 2016 से चल रहा है और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के सितंबर 2025 के आदेश के बाद ईडी ने जांच आगे बढ़ाई है।

दोनों ने समन पर पेश नहीं हुए और ईडी अब नई तारीख तय कर सकती है। यह घटना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। इनकम टैक्स विभाग ने 2016 में लुधियाना की चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणिंदर सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

इस चार्जशीट में रणिंदर सिंह पर विदेशी बिजनेस इकाइयों के जरिए संचालित और नियंत्रित विदेशी संपत्तियों के लाभार्थी होने का आरोप लगाया गया था। विभाग ने यह भी कहा कि रणिंदर सिंह स्विस बैंक अकाउंट्स के लाभार्थी थे, जो एचएसबीसी प्राइवेट बैंक (सुइस) एसए जिनेवा, स्विट्जरलैंड में थे।

आरोप था कि रणिंदर सिंह ने विभाग को गुमराह करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि उनके पास परिवार की आय और विदेशी ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज नहीं हैं, लेकिन जांच में यह गलत साबित हुआ।

दस्तावेजों से पता चला कि रणिंदर सिंह जुलाई 2005 में ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में एचएसबीसी ट्रस्ट कंपनी लिमिटेड के साथ ‘जैकरांडा ट्रस्ट’ के सेटलर थे। वे ट्रस्ट के संस्थापक थे और ट्रस्टी के रूप में काम कर रहे थे।

पिता-पुत्र ने लुधियाना कोर्ट के आदेश के खिलाफ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अपील की। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स रिकॉर्ड में फ्रांस सरकार द्वारा भारत को दी गई गोपनीय जानकारी है। दोनों देशों के बीच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट के तहत ऐसी जानकारी किसी तीसरे व्यक्ति को देने पर सख्त रोक है।

सितंबर 2025 में हाईकोर्ट ने एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश ठीक था और इसमें कानून की कोई कमी या गलती नहीं थी। यह मामला विदेशी संपत्तियों और फेमा उल्लंघन से जुड़ा है, जिसमें ईडी अब जांच आगे बढ़ा रही है।