गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की कार्रवाई, 122 ‘लाइव पीड़ितों’ को करोड़ों की ठगी से बचाया

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गौतमबुद्धनगर, 21 फरवरी (आईएएनएस)। गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 122 ‘लाइव पीड़ितों’ को करोड़ों रुपए की ठगी से बचाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2025 से लगातार चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

कमिश्नरेट की साइबर क्राइम टीम ने ऑनलाइन निवेश ठगी के खिलाफ एक बड़े और इंटेलिजेंस-आधारित अभियान को अंजाम देते हुए देशभर में 122 “लाइव पीड़ितों” को समय रहते चिन्हित कर करोड़ों रुपए के संभावित नुकसान से बचा लिया।

साइबर क्राइम टीम ने पुलिस उपायुक्त साइबर क्राइम के नेतृत्व में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4सी) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के साथ समन्वय स्थापित किया। साइबर एवं वित्तीय इंटेलिजेंस का उपयोग करते हुए रिपोर्टेड साइबर अपराधों से जुड़े फाइनेंशियल फ्लो का गहन अध्ययन किया गया। लेनदेन के पैटर्न और नेटवर्क संकेतों का विश्लेषण कर उन लोगों तक पहुंच बनाई गई जो लंबे समय से ठगों के प्रभाव में आकर लगातार रकम भेज रहे थे।

जांच के दौरान तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, ओडिशा, राजस्थान समेत विभिन्न राज्यों के कुल 122 ऐसे नागरिकों की पहचान हुई, जो ऑनलाइन निवेश घोटालों में फंसे हुए थे। अभियुक्त सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्टॉक मार्केट और अन्य निवेश योजनाओं में ऊंचे रिटर्न का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे।

कई पीड़ितों को महीनों तक यह एहसास ही नहीं हुआ कि उनके साथ धोखाधड़ी हो रही है। साइबर टीम ने स्वयं पहल करते हुए प्रत्येक संभावित पीड़ित से सीधे संपर्क स्थापित किया और उन्हें ठगी की वास्तविकता से अवगत कराया। समय पर दी गई चेतावनी के बाद सभी ने आगे की ट्रांजेक्शन रोक दी, जिससे एक सक्रिय इन्वेस्टमेंट फ्रॉड नेटवर्क को बीच में ही निष्क्रिय किया जा सका।

पुलिस ने बैंक खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और संबंधित अभियुक्तों के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। एक मामले में ओडिशा निवासी व्यक्ति को “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर डराकर 41 लाख रुपए की ठगी की जा चुकी थी।

साइबर टीम को जांच के दौरान इसकी जानकारी मिली और तत्काल पीड़ित से संपर्क किया गया। टीम ने उन्हें बताया कि वे साइबर ठगी के शिकार हुए हैं और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से धनराशि वापस पाने के विकल्पों की जानकारी दी।

दूसरे मामले में नोएडा निवासी व्यक्ति ने फेसबुक पर दिखी एक निवेश योजना में 3.48 लाख रुपए निवेश कर दिए थे। साइबर टीम ने समय रहते संपर्क कर उन्हें आगे निवेश न करने की सलाह दी और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया समझाई।