मथुरा, 1 मार्च (आईएएनएस)। देश के अलग-अलग हिस्सों में होली के रंग उड़ने लगे हैं। ब्रज मंडल में 25 फरवरी के साथ ही होली का शुभारंभ हो चुका है और अब गोकुल में छड़ीमार होली की धूम देखने को मिली।
गोकुल में श्रीकृष्ण के रंग में रंगे भक्तों को होली का आनंद लेते हुए देखा गया। भक्तों ने रसिया गीतों और जय श्रीकृष्ण के उद्घोष के साथ एक-दूसरे को गुलाल लगाया।
गोकुल में होली का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। श्रीकृष्ण की भक्ति के साथ भक्त हाथों में छड़ी लेकर प्यार से एक-दूसरे पर रंग बरसा रहे हैं। राधा रानी की सखियां बनी महिलाएं सज-धज कर ग्वालों पर छड़ी से वार कर रही हैं। गोकुल में इस अद्भुत होली के दर्शन करने के लिए भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। होली का आनंद लेने पहुंची एक महिला श्रद्धालु ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “एक महीने पहले से होली खेलने की तैयारी शुरू हो जाती है और हम सभी बेसब्री से होली खेलने का इंतजार करते हैं।”
उन्होंने गोकुल की होली का महत्व बताते हुए कहा, “यहां छड़ी से होली खेली जाती है, क्योंकि गोकुल में श्रीकृष्ण के बाल रूप का पूजन किया जाता है। छड़ी श्रीकृष्ण को न लगे, इसलिए हम भक्त भी छड़ी का इस्तेमाल करते हैं।” होली खेल रहे एक अन्य भक्त ने बताया कि यह होली नंद के लाल की होली है, बाल कृष्ण की होली है, जिसमें छड़ी से होली खेलने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। हम एक-दूसरे को बहुत ही प्यार से छड़ी से मारते हैं। ऐसा लगता है कि खुद साक्षात बाल श्रीकृष्ण हमारे साथ होली का आनंद लेने के लिए आए हैं।
वहीं, प्रयागराज में सनातनी किन्नर अखाड़े में भी होली का आयोजन हुआ। किन्नर अखाड़े ने आचार्य कौशल्या नंद गिरि के नेतृत्व में भक्ति और हर्षोल्लास के साथ होली पूजन और होली खेलने का कार्यक्रम आयोजित किया। सनातनी किन्नर अखाड़े की आचार्य और महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरी ने कहा, “होली पूरे साल का सबसे बड़ा त्योहार है। हमने सनातनी किन्नर अखाड़े में होली का आयोजन किया है और इस होली का उद्देश्य सिर्फ रंग लगाना नहीं बल्कि खुशियां बांटना भी है। हम सभी के लिए प्रार्थना करते हैं कि इस होली सभी की परेशानियां दूर हों और सभी के घर मां लक्ष्मी का आगमन हो।”

