गुजरात सरकार के ‘भागीरथ अभियान’ से टीबी के खिलाफ मिसाल बना गिर सोमनाथ

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सोमनाथ, 17 फरवरी (आईएएनएस)। ‘स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत’ के विजन को साकार करने के लिए देशभर में टीबी के खिलाफ जंग तेज हो चुकी है। गुजरात का गिर सोमनाथ जिला इस लड़ाई में एक मिसाल बनकर उभरा है। केंद्र सरकार के सहयोग और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार गिर सोमनाथ में टीबी उन्मूलन के लिए ‘भागीरथ अभियान’ चला रही है।

इसके तहत, हेल्थ वर्कर, आशा वर्कर और पैरा-मेडिकल स्टाफ की टीम गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों का हेल्थ चेकअप कर रही हैं।

लाभार्थी परिजन अश्विन भाई झाला ने बताया कि ‘स्वास्थ्य सहाय योजना’ भी है, जिसके तहत बिल पेश करके सहायता ले सकते हैं। प्रधानमंत्री की तरफ से भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सामाजिक और राजनीतिक व्यक्ति भी टीबी के मरीज को अपनाकर उनका इलाज करवा सकते हैं।

जगु भाई मोरी ने बताया कि सरकार की योजना अच्छी है और अंतिम तबके का आदमी भी इसका लाभ ले सकता है। इसके लिए सरकार का खूब आभार।

जिले में इन दिनों एक्टिव केस फाइंडिंग (एसीएफ) ड्राइव जारी है। यह ड्राइव सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों और जंगल से सटे इलाकों तक भी इसकी पहुंच सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद जिले में कई एनजीओ, उद्योगपति, समाजसेवी और निजी अस्पताल भी मुहिम से जुड़े हैं। इनसे जुड़े लोग ‘निक्षय मित्र’ बनकर टीबी मरीजों की मदद कर रहे हैं। मरीजों को सरकारी सहायता के अलावा अतिरिक्त पौष्टिक राहत किट भी दी जा रही है।

निक्षय मित्र मंडल भाई रावलिया ने बताया कि दवा देने के बाद लोगों को राहत मिली है। उसके बाद पोषण किट भी दी जा रही है। इससे अंतिम तबके तक के लोगों को लाभ मिल रहा है। यह योजना बहुत अच्छी है।

गिर सोमनाथ की जिला टीबी अधिकारी डॉ. शीतल राम ने बताया कि इसके लिए जिला कलेक्टर के जरिए फंड तालुका स्तर पर दिया जाता है। अभियान के तहत जांच मुफ्त में की जाती है।

उन्होंने कहा कि हमारे जिले में टीबी की जांच के लिए पहले दो मशीनें थीं। अब छह नई मशीनें आ गई हैं। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन और जिलाधिकारी के सहयोग से इन्हें हर तालुका लेवल पर उपलब्ध कराया गया है। इन मशीनों से जांच और निदान मुफ्त में हो सकेगा। एक जांच की लागत लगभग 1,500 रुपए है।

‘टीबी हारेगा, भारत जीतेगा’ के लक्ष्य की दिशा में गिर सोमनाथ जिले की यह पहल दिखाती है कि राज्य सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति, समर्पित हेल्थ सिस्टम और समाज के सहयोग से किसी भी गंभीर बीमारी को हराया जा सकता है।