बहरीन गिरफ्तारी से पाकिस्तानी दूतावास की खामियां आई सामने: रिपोर्ट

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इस्लामाबाद, 15 मार्च (आईएएनएस)। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के दृश्यों को रिकॉर्ड कर उन्हें सोशल मीडिया पर शेयर करने वाले पांच पाकिस्तानियों की पहचान हुई। बहरीन में इनकी गिरफ्तारी भी हुई। एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तारी ने इस्लामाबाद कॉन्सुलेट की पोल खोल कर रख दी है। जो अपने लोगों के कानूनी अधिकारों की सुरक्षा और विदेशों में फंसे अपने नागरिकों की रक्षा को लेकर सजग नहीं है।

पाकिस्तानी दैनिक ‘डॉन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, 10 मार्च को बहरीन के अधिकारियों ने छह एशियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया, जिनमें पांच पाकिस्तानी नागरिक शामिल थे। इन पर बहरीन पर हुए ईरानी हमलों के बाद के हालात से जुड़े वीडियो बनाने, उन्हें प्रकाशित करने और फैलाने का आरोप है।

ये गिरफ्तारियां एक बढ़ते हुए युद्ध के बीच हुई हैं। इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमले किए थे। बाद में यह युद्ध पूरे पश्चिम एशिया में फैल गया।

बहरीन पुलिस के मीडिया सेंटर से जारी बयान में कहा गया है कि इन संदिग्धों ने “उन कृत्यों के प्रति सहानुभूति दिखाई और उनका महिमामंडन किया, जिससे सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है।”

अधिकारियों ने आगे कहा कि इन वीडियो से “जनमत को गुमराह करने और नागरिकों के बीच डर फैलाने” में मदद मिली। इसी वजह से इन संदिग्धों को पब्लिक प्रॉसिक्यूशन (सरकारी अभियोजन) के हवाले कर दिया गया।

वकीलों का तर्क है कि पाकिस्तान को युद्ध जैसे हालात में भी अपने नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए।

‘जस्टिस पाकिस्तान प्रोजेक्ट’ की वकील और एडवोकेसी ऑफिसर रिमशा आसिफ ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान को गिरफ्तार लोगों के लिए तुरंत ‘कॉन्सुलर एक्सेस’ (राजनयिक संपर्क) सुनिश्चित करना चाहिए। साथ ही, यह भी पक्का करना चाहिए कि उन्हें कानूनी सहायता और दुभाषिए उपलब्ध कराए जाएं।

‘डॉन’ ने आसिफ के हवाले से लिखा, “पाकिस्तान के दूतावासों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि गिरफ्तार लोगों के परिवारों को इसकी सूचना दी जाए और वे अपने परिवारों से बातचीत कर सकें।”

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय को सबसे पहले यह पता लगाना चाहिए कि इन गिरफ्तारियों में किस विशिष्ट आपराधिक कानून का इस्तेमाल किया गया है। इसके बाद, उन्हें राजनयिक माध्यमों से इन लोगों की रिहाई के लिए प्रयास करने चाहिए या सजा में नरमी की अपील करनी चाहिए।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान और बहरीन के बीच कैदियों के आदान-प्रदान का कोई समझौता न होने के कारण यह मामला और भी जटिल हो गया है।

आसिफ ने कहा, “इसका मतलब यह है कि अगर इन लोगों को दोषी ठहराया भी जाता है, तो भी फिलहाल ऐसा कोई कानूनी ढांचा मौजूद नहीं है जिसके तहत वे अपनी सजा पाकिस्तान में काट सकें।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इससे “मानवीय आधार पर कैदियों के आदान-प्रदान के विकल्प सीमित हो जाते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला उन व्यापक कठिनाइयों को दर्शाता है जिनका सामना विदेशी जेलों में बंद 23,000 से अधिक पाकिस्तानी नागरिक करते हैं। इनमें से कई लोग अक्सर बिना किसी पर्याप्त सहारे के ही विदेशी कानूनी प्रणालियों से जूझते रहते हैं।

आसिफ ने कहा, “विदेशों में आपराधिक मामलों का सामना कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों की बेहतर सुरक्षा के लिए कॉन्सुलर सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना, विदेशों में बंद कैदियों के लिए कानूनी सहायता में सुधार करना और खाड़ी देशों के साथ कैदियों के आदान-प्रदान के समझौतों का विस्तार करना—ये सभी आवश्यक कदम हैं।”