‘कोलकाता बांग्लादेश है’: तृणमूल ने भाजपा के बंगाल चुनाव घोषणापत्र पर निशाना साधा

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नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। तृणमूल कांग्रेस ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में आगामी दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषणापत्र की आलोचना की। तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने भाजपा पर कोलकाता को ‘बांग्लादेश’ की तरह मानने का आरोप लगाया, जबकि अन्य विपक्षी नेताओं ने भाजपा पर ‘मतदाताओं को लुभाने’ का प्रयास करने का आरोप लगाया।

गौरतलब है कि घुसपैठ के खिलाफ जोरी टोलरेंस, एक पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त राज्य भर्ती तंत्र का विकास, आर्थिक प्रगति और महिला सशक्तिकरण भाजपा के चुनाव घोषणापत्र में शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल थे, जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को जारी किया था।

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि पहले भाजपा के चुनावी घोषणापत्र को ‘सोनार बांग्ला संकल्प पत्र’ कहा जाता था, लेकिन अब शायद उन्हें लगता है कि बंगाल पहले ही ‘सोनार बांग्ला’ बन चुका है, इसलिए उन्होंने यह शब्द हटा दिया है और इसे सिर्फ ‘संकल्प पत्र’ कह रहे हैं।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के लागू होने से पश्चिम बंगाल में भाजपा और चुनाव आयोग द्वारा पैदा की गई स्थिति के लिए पहले जनता से माफी मांगेंगे।

उन्होंने भाजपा के घोषणापत्र के प्रस्तावों की तुलना चिट फंड या पोंजी योजनाओं द्वारा निवेश पर अधिक लाभ के वादों से की।

इसके अलावा, अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि आज उन्होंने (अमित शाह) सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि अगर भाजपा बंगाल में सत्ता में आती है, तो राज्य का प्रशासन दिल्ली से चलेगा। यह सबने देखा है।

तृणमूल कांग्रेस के महासचिव ने आगे कहा कि इसका मतलब है (भाजपा के लिए) कोलकाता बांग्लादेश है; उन्होंने (गृह मंत्री अमित शाह) खुद यह कहा है। अगर कोई बंगाल को बांग्लादेश के नजरिए से देखता है, तो वे इस देश के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) और गृह मंत्री हैं।

पश्चिम बंगाल में महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए भाजपा द्वारा प्रति माह 3,000 रुपए देने के वादे पर एनसीपी-एसपी सांसद फौजिया खान ने कहा, “देश में जहां भी चुनाव हो रहे हैं, सरकार जाकर महिलाओं को पैसे देने का वादा करती है। इससे यह पता चलता है कि महिलाएं गरीब हैं।”