नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। भारत के रजिस्ट्रार जनरल (आरजीआई) और जनगणना आयुक्त ने सोमवार को घोषणा की कि आगामी जनगणना की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पहले चरण में मकानों की सूची और आवास जनगणना (एचएलओ) के लिए कार्य अप्रैल से कई राज्यों में शुरू होने वाला है।
नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया केंद्र में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने कहा कि जनगणना-2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। मकानों की सूची (एचएलओ) और जनसंख्या गणना (पीई) – के लिए 1 मार्च 2027 को संदर्भ तिथि के रूप में निर्धारित किया गया है। लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिमपातग्रस्त क्षेत्रों के लिए 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है।
उन्होंने तिथि के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह एक निश्चित समय की तस्वीर के रूप में कार्य करती है, जिससे पूरे देश में एकसमान और विश्वसनीय जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक डेटा एकत्र करना संभव होता है।
नारायण ने कहा, “जनगणना संदर्भ दिवस महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक निश्चित समय की तस्वीर के रूप में कार्य करता है, जो विशाल और विविध जनसंख्या में सटीक जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक डेटा प्राप्त करने के लिए एक समान संदर्भ बिंदु प्रदान करता है, जिससे डेटा की स्थिरता और वैधता सुनिश्चित होती है।”
कानूनी सुरक्षा उपायों पर प्रकाश डालते हुए नारायण ने कहा, “जनगणना अधिनियम में एक महत्वपूर्ण प्रावधान धारा 15 शामिल है, जिसमें कहा गया है कि दी गई व्यक्तिगत जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय माना जाता है। इसे सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रकट नहीं किया जा सकता है, अदालत में साक्ष्य के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है या किसी अन्य संगठन के साथ साझा नहीं किया जा सकता है।”
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की भूमिका अहम है। उनका पूरा प्रशासनिक तंत्र जमीनी स्तर पर कार्य करने में लगा हुआ है। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी।
जनगणना आयुक्त ने बताया कि इस प्रक्रिया में दो चरण होंगे। मकानों की सूची बनाना और गृह जनगणना (एचएलओ) और गृह सूचीकरण (पीई)।
उन्होंने कहा, “जनगणना की तैयारियां अब उन्नत स्तर पर हैं और कुछ ही दिनों में पहले चरण के गृह सूचीकरण और आवास जनगणना के लिए कई राज्यों में कार्य शुरू होने वाला है।”
गृह जनगणना में सभी भवनों और संरचनाओं की सूची बनाना और आवास की स्थिति, सुविधाओं और संपत्तियों के बारे में जानकारी एकत्र करना शामिल होगा। इसमें भवनों की जियो-टैगिंग और प्रत्येक संरचना को एक विशिष्ट पहचान संख्या आवंटित करना भी शामिल होगा। यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच आयोजित किया जाना निर्धारित है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से नागरिक सीधे अपनी जानकारी दर्ज करके स्वयं जनगणना कर सकेंगे, जिससे जनगणना कर्मियों पर निर्भरता कम होगी और प्रक्रिया अधिक कुशल बनेगी।
उन्होंने बताया कि स्व-गणना की यह सुविधा 30 दिवसीय गृहसूची अभियान से पहले 15 दिनों के लिए उपलब्ध रहेगी।11 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अप्रैल 2026 में गृहसूची प्रक्रिया शुरू करेंगे। नौ राज्य मई में, तीन राज्य जून में, दो राज्य जुलाई में और दो राज्य अगस्त में इसे पूरा करेंगे।
दूसरे चरण में जनसंख्या गणना होगी, जिसमें आयु, लिंग, व्यवसाय, साक्षरता और जाति संबंधी जानकारी सहित व्यक्तिगत स्तर के डेटा को एकत्रित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
नारायण ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिसंबर 2025 में जनगणना के लिए कुल 11,718.24 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। प्रशासनिक सीमाएं 1 जनवरी, 2026 से स्थिर कर दी गई थीं और पिछले वर्ष नवंबर में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पहले चरण का पूर्व-परीक्षण किया गया था। जनगणना के दोनों चरणों के लिए देशभर में 80,000 से अधिक गणनाकर्ताओं के प्रशिक्षण बैच गठित किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया के दौरान संपूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत तंत्र स्थापित किए गए हैं और इसमें शामिल डेटा केंद्रों को महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (क्रिटिकल इन्फॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर) के रूप में नामित किया गया है।




