जबलपुर, 13 फरवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में प्रशासन द्वारा बुलडोजर से दुकान गिराए जाने के बाद एक युवा व्यापारी की दुखद मौत ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। विपक्ष मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और जांच की मांग कर रहा है।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को शहर के बरगी इलाके में जिला प्रशासन के राजस्व अधिकारियों और पुलिस की एक टीम ने मिलकर मिंटू अग्रवाल (39) की दुकान पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। इस दौरान कपड़ा व्यापारी मिंटू अग्रवाल बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।
मिंटू को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
गुरुवार रात इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जिसके बाद परिवार के सदस्यों और अन्य दुकान मालिकों ने देर रात पुलिस स्टेशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया।
आक्रोशित व्यापारियों और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का एफआईआर दर्ज करने और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग की। अधिकारियों से आश्वासन मिलने के बाद देर रात विरोध प्रदर्शन समाप्त हुआ।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शुक्रवार को जिला प्रशासन की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि एक पल में किसी परिवार की आजीविका, सपने और सहारा छीन लेना असंवेदनशील शासन का प्रतीक है।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि क्या जबलपुर जिला प्रशासन ने उस दुकान के संबंध में उच्च न्यायालय के स्टे ऑर्डर की अनदेखी की? पटवारी ने कहा कि अगर स्टे ऑर्डर था, तो उसकी अनदेखी क्यों की गई? सरकार को जवाब देना चाहिए।
एक बयान में कांग्रेस नेता ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह करता हूं कि वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि पीड़ित परिवार को न्याय और उचित मुआवजा मिले।

