नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने उस अहम क्षण को याद किया, जब अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में भारत की जीत को लेकर संदेह बना हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दृढ़ फैसले ने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी।
भारतीय पॉडकास्टर और उद्यमी राज शमानी के यूट्यूब चैनल पर बातचीत के दौरान अकबरुद्दीन ने कुलभूषण जाधव मामले में भारत की कानूनी लड़ाई से जुड़े कई अहम पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में काफी संदेह था, लेकिन प्रधानमंत्री ने आईसीजे जाने का स्पष्ट और निर्णायक फैसला लिया।
उन्होंने कहा, “यह कुलभूषण जाधव का मामला था। हमने इसे आईसीजे में इसलिए ले जाने का फैसला किया, क्योंकि हमें एक छोटा-सा अंतरराष्ट्रीय रास्ता दिखा, जिससे उनकी फांसी को रोका जा सकता था। हमने लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन हम काफी देर कर चुके थे। मैं खुद उन लोगों में था, जिन्हें लगा कि हम यह मामला नहीं जीत पाएंगे। लेकिन प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे पता है आप ऐसा सोचते हैं, पर फैसला हो चुका है। जब भारत के प्रधानमंत्री कहते हैं कि फैसला हो गया है, तो मेरा काम उसे लागू करना है।”
अकबरुद्दीन ने आगे बताया कि औपचारिक घोषणा से पहले ही भारत के पक्ष में कूटनीतिक समर्थन बनना शुरू हो गया था। उन्होंने कहा, “हमें पहला समर्थन तब मिला, जब हमने आधिकारिक रूप से अपनी उम्मीदवारी घोषित भी नहीं की थी। प्रधानमंत्री की उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद वहां के राजदूत ने मुझसे मिलकर कहा कि वे भारत के उम्मीदवार को वोट देंगे, जबकि हमने अभी उम्मीदवार घोषित नहीं किया था। इसने हमें काफी उत्साहित किया और यह संकेत मिला कि मामला गंभीर है और सभी इसमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। इसी वजह से हमने पूरी ताकत से प्रयास किया और पहली बार जीत हासिल की।”
गौरतलब है कि कुलभूषण जाधव पाकिस्तान में मौत की सजा का सामना कर रहे भारतीय नागरिक हैं, उन पर जासूसी और तोड़फोड़ की गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
पाकिस्तान के अनुसार, जाधव को 3 मार्च 2016 को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था, जबकि भारत का कहना है कि उन्हें ईरान के चाबहार शहर से अगवा किया गया था, जहां वे नौसेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति के बाद व्यवसाय कर रहे थे।
भारत ने 18 मई 2017 को आईसीजे में अपील दायर की, जिसके बाद पाकिस्तान ने जाधव की फांसी पर रोक लगा दी। 17 जुलाई 2019 को आईसीजे ने अपना फैसला सुनाते हुए भारत की रिहाई की मांग को खारिज कर दिया, लेकिन पाकिस्तान को जाधव के मुकदमे और सजा की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और भारत को कांसुलर एक्सेस देने का आदेश दिया।
इसके बाद पाकिस्तान ने जाधव को कांसुलर एक्सेस प्रदान किया। 2 सितंबर 2019 को भारत के तत्कालीन चार्ज द’अफेयर्स गौरव अहलूवालिया ने पाकिस्तान की एक जेल में जाधव से मुलाकात की।
जाधव की गिरफ्तारी के लगभग एक महीने बाद पाकिस्तान ने उनका एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने खुद को जासूस बताया था। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस वीडियो को फर्जी और जबरन तैयार किया गया बताते हुए खारिज कर दिया था।


