हिंदी के खिलाफ नहीं, दो-भाषा नीति पर अभी कोई फैसला नहीं: सिद्धारमैया

0
9

मैसूरु, 28 मार्च (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शनिवार को हिंदी भाषा को लेकर चल रहे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य सरकार हिंदी के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने के पक्ष में भी नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में दो-भाषा नीति को लेकर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

मैसूरु एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष से एसएसएलसी (कक्षा 10) के परिणाम में तीसरी भाषा के रूप में हिंदी को शामिल न करने का फैसला लिया है। यानी अब हिंदी में प्राप्त अंक कुल अंकों में नहीं जोड़े जाएंगे। इसके चलते कुल अंक 625 से घटकर 525 रह जाएंगे।

उन्होंने कहा, “सरकार हिंदी सीखने के खिलाफ नहीं है, लेकिन परीक्षा में पास होने के लिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।” उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी फैसले पर समर्थन और विरोध दोनों होते हैं और सभी की सहमति मिलना संभव नहीं है।

सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा हिंदी थोपने या न सीखने का नहीं है, बल्कि केवल इसे अनिवार्य विषय न बनाने का है। उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय हिंदी अनिवार्य नहीं थी, इसलिए उन्होंने इसे नहीं पढ़ा।

उपचुनावों को लेकर उन्होंने भरोसा जताया कि कांग्रेस दावणगेरे और बागलकोट दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगी। उन्होंने अपने चुनावी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि वह 30 मार्च से प्रचार शुरू करेंगे और 5 अप्रैल को केरल में भी चुनाव प्रचार के लिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के उपचुनावों में कांग्रेस की जीत भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है और इस बार भी पार्टी दोनों सीटें जीतेगी।

मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही अटकलों पर उन्होंने कहा कि उपचुनावों का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा, “अगर पार्टी हाईकमान अनुमति देता है तो मैं अगले दो वर्षों का बजट भी पेश करूंगा। हम हाईकमान के निर्देशों के अनुसार काम करते हैं।”

मैसूरु में ड्रग तस्करी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सरकार ने इस पर सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है और राज्य को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि मैसूरु में एक ड्रग नेटवर्क की पहचान की गई है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।