एलंगोवन का फडणवीस पर पलटवार, बोले- डीएमके सामाजिक न्याय पर आधारित है, हिंदू-विरोधी नहीं

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चेन्नई, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से तमिलनाडु सरकार पर ‘सनातन-विरोधी’ और ‘हिंदू-विरोधी’ होने का आरोप लगाने के बाद द्रविड़ मुन्नेत्र कजगम (डीएमके) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच राजनीतिक खींचतान सोमवार को और तेज हो गई।

इसके जवाब में डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डीएमके भारत की एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी शुरुआत उन हिंदुओं के लिए की गई थी, जिन्हें उच्च जातियों द्वारा हाशिए पर धकेल दिया गया था।

एलंगोवन ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि डीएमके की स्थापना हिंदू समाज के भीतर हाशिए पर पड़े वर्गों को ऊपर उठाने के उद्देश्य से की गई थी, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्हें ऐतिहासिक रूप से पारंपरिक जाति व्यवस्था के तहत शूद्र और पंचम के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

उन्होंने कहा कि पार्टी की वैचारिक जड़ें द्रविड़ आंदोलन में निहित हैं, जिसका उद्देश्य दमित समुदायों के लिए शिक्षा, रोजगार और गरिमा तक पहुंच सुनिश्चित करना था।

एलंगोवन ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि डीएमके भारत की एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी स्थापना उच्च जातियों द्वारा हाशिए पर धकेल दिए गए हिंदुओं के हित में की गई थी। इस आंदोलन की शुरुआत उन्हें शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने के लिए की गई थी। यह हिंदुओं के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने तर्क दिया कि हिंदुओं का एक बड़ा बहुमत, जिसे उन्होंने पारंपरिक जाति व्यवस्था के दायरे में आबादी का लगभग 90 प्रतिशत बताया, ऐतिहासिक रूप से बहिष्कार और भेदभाव का सामना करता रहा है। उनके अनुसार, डीएमके की नीतियों और राजनीतिक कार्यों का उद्देश्य लगातार इन असमानताओं को दूर करना रहा है।

डीएमके नेता ने बताया कि लगभग एक सदी पहले तमिलनाडु में अस्पृश्यता और सामाजिक बहिष्कार की प्रथाएं प्रचलित थीं। दलितों को बसों में यात्रा करने या शिक्षा प्राप्त करने की भी अनुमति नहीं थी। इस वास्तविकता को बदलने, और सभी के लिए समानता और अवसर सुनिश्चित करने के लिए द्रविड़ आंदोलन शुरू किया गया था।

एलंगोवन ने हिंदू-विरोधी होने के आरोप को भी खारिज कर दिया, और इसके बजाय तर्क को ही पलट दिया।

उन्होंने कहा कि हम हिंदू-विरोधी नहीं हैं। हम हिंदुओं के कल्याण के लिए खड़े हैं। जो लोग हिंदुओं के बहुमत को अछूत या हीन मानकर हाशिए पर धकेलते हैं, असल में वही लोग हिंदू-विरोधी हैं।

इससे पहले दिन में, सीएम फडणवीस ने डीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार की आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि यह ‘सनातन-विरोधी’ और ‘हिंदू-विरोधी’ है, और हिंदू परंपराओं तथा मूल्यों की अनदेखी करते हुए तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त है।

उन्होंने राज्य सरकार पर न्यायिक निर्देशों का सम्मान करने में विफल रहने और उच्च न्यायालयों में उन्हें चुनौती देने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया।