आयोग ने पर्यवेक्षक के रूप में ड्यूटी से राहत देने की कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त की याचिका खारिज की

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कोलकाता, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) ने कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त और वर्तमान में पश्चिम बंगाल सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) सुप्रतिम सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने चुनावी राज्य तमिलनाडु में केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में जाने से राहत मांगी थी।

आयोग के एक सूत्र ने बताया कि आयोग ने सरकार को तमिलनाडु के पांच विधानसभा क्षेत्र तिरुनेलवेली, अम्बासमुद्रम, पलायमकोट्टई, नांगुनेरी और राधापुरम के लिए पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में रिपोर्ट करने का भी निर्देश दिया है।

इससे पहले, 4 अप्रैल को आयोग ने सरकार को तमिलनाडु में पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का फैसला लिया था। हालांकि, सुप्रतिम सरकार ने तुरंत चिकित्सा कारणों का हवाला देते हुए आयोग से तमिलनाडु प्रतिनियुक्ति से राहत देने का अनुरोध किया था।

अब, अंततः आयोग द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद सरकार के पास सोमवार तक तमिलनाडु में रिपोर्ट करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

पश्चिम बंगाल में मतदान की तारीखों की घोषणा से कुछ ही दिन पहले ममता सरकार ने मनोज कुमार वर्मा के स्थान पर सुप्रतिम सरकार को कोलकाता पुलिस का आयुक्त नियुक्त किया था।

हालांकि, आचार संहिता लागू होने के बाद आयोग ने उन्हें उस पद से हटा दिया और पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी किसी भी कार्य से प्रतिबंधित कर दिया। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार अजय नाना को नियुक्त किया गया है।

इसके बाद भी भारतीय जनता पार्टी की ओर से मतदान अवधि के दौरान सुप्रतिम सरकार को राज्य से बाहर भेजने की लगातार मांग उठती रही।

भाजपा का तर्क था कि पश्चिम बंगाल में मतदान अवधि के दौरान यदि सरकार जैसे पुलिस अधिकारियों को राज्य से नहीं हटाया गया, तो वे पुलिस प्रशासन में अपने-अपने पदों पर बैठे-बैठे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करते रहेंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में दो चरणों में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होंगे। पहले चरण में 152 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा और दूसरे चरण में शेष 142 सीटों पर मतदान होगा। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।