पश्चिम एशिया संकट पर भारत का रुख संतुलित, क्षेत्रीय मुद्दों में बाहरी दखल से बचना चाहिए: पूर्व रॉ प्रमुख विक्रम सूद

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नई दिल्ली, 6 मार्च (आईएएनएस)। रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख विक्रम सूद ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया में संकट को लेकर भारत एक समझदारी भरा और संतुलित रुख अपना रहा है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय संघर्षों का समाधान केवल वही देश कर सकते हैं, जो सीधे तौर पर उसमें शामिल हैं।

आईएएनएस से बातचीत में विक्रम सूद ने कहा कि बाहरी शक्तियों को क्षेत्रीय मुद्दों में अनावश्यक दखल देने से बचना चाहिए। मुझे लगता है कि हम यहां बहुत समझदारी से काम कर रहे हैं। पश्चिम एशिया की समस्याओं को हम हल नहीं कर सकते। यह काम उसी क्षेत्र के लोगों को खुद करना होगा। बेवजह हस्तक्षेप करने का कोई मतलब नहीं है।

पूर्व रॉ प्रमुख ने कहा कि खुफिया रणनीति के मामले में दीर्घकालिक सोच बेहद जरूरी है, खासकर ऐसे समय में जब नई तकनीकें वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को तेजी से बदल रही हैं।

उन्होंने कहा, “इंटेलिजेंस रणनीति पर सतही चर्चा नहीं की जा सकती। खुफिया तंत्र को आने वाले 20 साल बाद भी प्रासंगिक रहना होगा। इसे लगातार विकसित और प्रभावी बनाए रखना जरूरी है। सरकारों को यह भी सोचना होगा कि एआई और उससे जुड़ी तकनीकों के साथ आगे कैसे बढ़ना है।”

उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में भारत के सामने कई चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।

सूद ने कहा कि एक महाशक्ति का प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अस्थिरता पैदा हो सकती है। वहीं चीन के साथ हमारे संबंध भी अभी सबसे अच्छे दौर में नहीं हैं।

भारत के प्रमुख भू-राजनीतिक और भू-आर्थिक मंच रायसीना डायलॉग के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने इसे देश में आयोजित होने वाले सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मंचों में से एक बताया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह आज देश में हो रहे सबसे अच्छे संवादों में से एक है। इसका दायरा बहुत व्यापक है और इसमें उठाए जाने वाले विषय महत्वपूर्ण और भविष्य से जुड़े हैं। मुझे खुशी है कि यह आयोजन हो रहा है और लोग इस पर ध्यान दे रहे हैं।”