इंडोनेशिया के सेंट्रल जावा में बाढ़ का कहर: एक लापता, करीब 3000 लोगों को छोड़ना पड़ा घर

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जकार्ता, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। इंडोनेशिया के सेंट्रल जावा प्रांत के डेमाक क्षेत्र में बाढ़ के कारण लगभग 3,000 निवासियों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, जबकि एक व्यक्ति के लापता होने की खबर है। देश की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी ने शनिवार को यह जानकारी दी।

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के बाद हालात बिगड़े, जल स्तर बढ़ गया और दुकुह सोलोवेरे और दुकुह सेलोडोको में तटबंध टूट गए, जिससे आस-पास के रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के प्रवक्ता अब्दुल मुहारी ने एक लिखित बयान में कहा, “कुल 1,070 परिवार, या 4,280 लोगों पर इसका असर पड़ा। इनमें से 2,839 निवासियों को कई आश्रय स्थलों में सुरक्षित पहुंचाया गया है, जबकि एक अभी भी लापता है।”

डेमाक क्षेत्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के एक त्वरित आकलन से पता चला कि चार जिलों के आठ गांवों पर बाढ़ का नकारात्मक असर पड़ा।

राहत और बचाव कार्य जारी है। स्थानीय अधिकारियों और आपातकालीन टीमों ने निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। अस्थायी आश्रय स्थल बनाए गए हैं, क्षतिग्रस्त तटबंधों को मजबूत करने के लिए रेत की बोरियां वितरित की गई हैं, और रेस्क्यू किए गए लोगों को भोजन और चिकित्सा सहायता प्रदान की गई है। लापता निवासी की तलाश के लिए बचाव अभियान जारी था।

वहीं, गुरुवार को, पूर्वी इंडोनेशिया के मालुकु क्षेत्र में 7.6 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप आया था।

बचाव कार्य के दौरान एक महिला का शव बरामद किया गया। उत्तरी सुलावेसी की राजधानी मनाडो में स्थानीय खोज और बचाव टीम ने बताया कि पीड़ित, जो उत्तरी सुलावेसी के मिनाहासा क्षेत्र की 70 वर्षीय निवासी थी, भूकंप के दौरान ढहती इमारत के मलबे की चपेट में आने से मारी गई।

देश की राष्ट्रीय आपदा न्यूनीकरण एजेंसी (बीएनपीबी) ने गुरुवार सुबह एक बयान में कहा कि यह शक्तिशाली भूकंप उत्तरी सुलावेसी के बिटुंग शहर के दक्षिण-पूर्व समुद्र में आया। बिटुंग और आसपास के इलाकों में 10 से 20 सेकंड तक बहुत तेज झटके महसूस किए गए थे।

बीएनपीबी ने कहा कि बाद में दो और झटके (आफ्टरशॉक्स) महसूस किए गए, और बताया कि शुरुआती आंकड़ों से पता चलता है कि टेर्नेट में हल्का से मध्यम नुकसान हुआ है।

इन झटकों से घबराहट फैल गई और निवासी अपने घरों से बाहर भाग निकले। सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों और वीडियो में इमारतों को काफी नुकसान पहुंचा हुआ दिखा; छतें टूटकर जमीन पर गिरी हुई थीं और इमारतें भी क्षतिग्रस्त थीं।

बीएनपीबी ने कहा कि इस भूकंप से उत्तरी मालुकु और उत्तरी सुलावेसी में सुनामी आने की आशंका थी, जिसके चलते “अलर्ट” और “सावधानी” की स्थिति वाले शुरुआती चेतावनी संदेश जारी किए गए थे।

हालांकि, इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (बीएमकेजी) ने बाद में सुनामी की चेतावनी वापस ले ली, क्योंकि निगरानी के दौरान समुद्र के जलस्तर में कोई खास बदलाव नहीं दिखा। स्थानीय सरकारें भी निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर चले जाने का निर्देश देने का आग्रह कर रही थीं, जबकि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को समुद्र तटों और नदी किनारों से दूर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई थी।