हेमा मालिनी ने उठाया बंगाल में सांस्कृतिक फासीवाद का मुद्दा, लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र

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नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। भाजपा सांसद और अभिनेत्री हेमा मालिनी ने बुधवार को पश्चिम बंगाल में सांस्कृतिक फासीवाद पर चिंता जताई। उनका कहना है कि यह स्थिति सुरक्षा जोखिम पैदा करती है और आजीविका पर नकारात्मक प्रभाव भी डालती है। इसको लेकर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी लिखा है।

हेमा मालिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए बताया कि उन्होंने अपने पत्र में पश्चिम बंगाल में कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि वहां का माहौल कलाकारों के लिए ठीक नहीं है और इसका असर उनके काम और रोजगार पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति सिर्फ सांस्कृतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि यह एक तरह से सुरक्षा का मुद्दा भी बनती जा रही है। उनके मुताबिक, जब कलाकार खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते या अपने काम को सामने नहीं ला पाते तो यह पूरे समाज के लिए चिंता की बात होती है।

हालांकि, जब मीडिया ने उनसे इस पत्र के पीछे की वजह के बारे में पूछा, तो उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि यह उनका निजी अनुभव रहा है, जिसने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि कलाकारों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। यह देखकर मुझे बहुत दुख हुआ।”

सांस्कृतिक फासीवाद शब्द का मतलब आमतौर पर यह होता है कि किसी खास विचारधारा के तहत संस्कृति, कला, मीडिया और शिक्षा को नियंत्रित या प्रभावित किया जाए।

पश्चिम बंगाल में इस तरह के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। पिछले साल फिल्म द बंगाल फाइल्स को लेकर भी विवाद हुआ था। फिल्म से जुड़े लोगों ने दावा किया था कि राज्य में इसकी रिलीज़ से पहले ही इसे अनौपचारिक रूप से रोक दिया गया।

फिल्म की प्रोड्यूसर पल्लवी जोशी ने आरोप लगाया था कि थिएटर मालिकों पर दबाव डाला गया, जिसके कारण फिल्म के ट्रेलर लॉन्च को भी रद्द करना पड़ा।

हालांकि राज्य सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसा स्क्रीन की कमी के कारण हुआ, लेकिन फिल्म निर्माताओं का कहना था कि फिल्म के संवेदनशील विषय के कारण इसे दबाया जा रहा है।