मनोज झा ने सिलेबस से जिन्ना को हटाने की मांग पर उठाए सवाल, बोले-इतिहास की सर्जरी संभव नहीं

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नई दिल्ली, 21 मार्च (आईएएनएस)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से मोहम्मद अली जिन्ना को शैक्षणिक पाठ्यक्रम से तत्काल हटाने की मांग पर आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने शनिवार को कहा कि इतिहास को बदला नहीं जा सकता और इसे समग्र रूप से समझा जाना चाहिए।

मनोज झा ने आईएएनएस से बात करते हुए ऐसी मांगों के पीछे के तर्क पर सवाल उठाया और ऐतिहासिक हस्तियों का उनके संदर्भ में अध्ययन करने के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि किसका क्षेत्र क्या है और कौन किस क्षेत्र पर टिप्पणी कर रहा है। अगर आप मुहम्मद अली जिन्ना को हटा दें, तो आप दो-राष्ट्र सिद्धांत को कैसे समझेंगे?”

उन्होंने कहा, “आप उन विचारों पर कैसे विचार करेंगे जिनके विरुद्ध स्वतंत्रता संग्राम लड़ा गया था? इतिहास की सर्जरी करना संभव नहीं है। हम जो देख रहे हैं वह कथाओं को नया रूप देने का प्रयास है। भविष्य में फिल्म निर्माताओं को भी इतिहास को एक विशेष तरीके से प्रस्तुत करने के लिए कहा जा सकता है। ऐसे रुझान अभी से दिखाई दे रहे हैं।”

आरजेडी नेता ने ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, “जब भी आप काल्पनिक व्याख्याएं करना चाहें, कर सकते हैं, लेकिन इतिहास के साथ छेड़छाड़ न करें। यह देश के अतीत के साथ अन्याय है और उसे नीचा दिखाने का प्रयास है। कल अगर कोई दिल्ली सल्तनत को पाठ्यपुस्तकों से हटाने की मांग करे, तो हम ऐतिहासिक परिवर्तनों को कैसे समझ पाएंगे? इतिहास शून्य में नहीं होता, यह एक सतत प्रक्रिया है।”

इसी बीच, एबीवीपी ने जम्मू विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन किया और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शुरू किए गए संशोधित स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम से पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद अली जिन्ना पर आधारित अध्याय को हटाने की मांग की।

हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह दावा किया कि पाठ्यक्रम में जिन्ना को शामिल करना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशानिर्देशों के अनुरूप है और देशभर के कई विश्वविद्यालयों द्वारा अपनाए जाने वाले पाठ्यक्रम के अनुरूप है।

एबीवीपी जम्मू और कश्मीर के सचिव सन्नक श्रीवत्स के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी परिसर में जमा हुए और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाते हुए ‘अल्पसंख्यक और राष्ट्र’ नामक पेपर के अंतर्गत ‘आधुनिक भारतीय राजनीतिक विचार’ मॉड्यूल से इस अध्याय को तत्काल हटाने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने जिन्ना के पोस्टर भी फाड़ दिए और चेतावनी दी कि अगर पोस्टर पर लिखी सामग्री को नहीं हटाया गया तो वे अपना आंदोलन और तेज करेंगे।

इसके जवाब में जम्मू विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है। डीन अकादमिक मामलों के कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह समिति कुलपति के निर्देशों पर गठित की गई है और इसे जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।