नवाचार के दम पर भारत वैश्विक फार्मा सेक्टर में नेतृत्व करने को तैयार: जेपी नड्डा

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नई दिल्ली, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने सोमवार को कहा कि देश का फोकस अब बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर्स और स्पेशलिटी दवाओं पर है, जिसके चलते भारत आने वाले समय में वैश्विक फार्मा सेक्टर में नेतृत्व करने के लिए तैयार है।

जेपी नड्डा ने बताया कि सरकार ने हाल ही में ‘बायोफार्मा शक्ति पहल’ शुरू की है, जिसके लिए 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य बायोफार्मा इनोवेशन (नवाचार) को बढ़ावा देना और रिसर्च क्षमताओं को मजबूत करना है।

जेपी नड्डा ने पीआरआईपी स्कीम, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) प्रोग्राम और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना जैसी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये घरेलू उत्पादन बढ़ाने, सस्ती दवाओं की उपलब्धता और रिसर्च को बढ़ावा देने में मदद कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि ‘इंडिया फार्मा 2026’ इवेंट इस सेक्टर में संवाद, साझेदारी और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है।

वहीं, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उद्योग को अब इनोवेशन-आधारित सेगमेंट्स पर ज्यादा ध्यान देना होगा, क्योंकि वैश्विक फार्मा बाजार के करीब 87 प्रतिशत हिस्से में इनोवेटिव दवाओं का योगदान है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत अब सिर्फ जेनेरिक दवाओं का लीडर नहीं रह गया है, बल्कि तेजी से बायोफार्मा इनोवेशन हब के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने बताया कि भारत वैश्विक स्तर पर करीब 20 प्रतिशत जेनेरिक दवाओं की सप्लाई करता है और दुनिया की लगभग 70 प्रतिशत वैक्सीन की मांग पूरी करता है, जो देश की मजबूत मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को दर्शाता है।

भविष्य की संभावनाओं पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है और 2030 तक यह बाजार 75 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

उन्होंने आईआईआटी और एनआईपीईआर जैसे प्रमुख संस्थानों के जरिए रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

दोनों मंत्रियों ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग (डीओपी) द्वारा एफआईसीसीआई और इंडियन फार्मास्युटिकल एलाएंस के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन ‘इंडिया फार्मा 2026’ के 9वें संस्करण में भाग लिया।

यह कार्यक्रम वैश्विक फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के प्रमुख प्रतिनिधियों को एक साथ लाता है, जिसमें इनोवेशन, आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व पर विशेष जोर दिया जाता है।