भारत के हाल के एफटीए छोटे उद्योगों के लिए गेम चेंजर, बढ़ेगी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता : एक्सपर्ट

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नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) और डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित करने के कारण, लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) तेजी से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं। यह बयान गुरुवार को एमएसएमई संबंधी संसदीय स्थायी समिति के सदस्य खागेन मुर्मु ने दिया।

एसोचैम द्वारा आयोजित ‘ग्लोबल एसएमई कॉन्क्लेव’ में, मुर्मु ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के परिवर्तनकारी प्रभाव के साथ-साथ यूरोपीय संघ (ईयू) के साथ हाल में हुए एफटीए का जिक्र किया।

मुर्मु ने कहा,“ये समझौते भारतीय लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए गेमचेंजर साबित हो रहे हैं। शून्य या न्यूनतम टैरिफ की सुविधा प्रदान करके, ये समझौते भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को, विशेष रूप से वस्त्र, हस्तशिल्प और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी हद तक बढ़ा रहे हैं।”

भारत के कुल निर्यात में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) का योगदान लगभग 45-48 प्रतिशत है, और मुर्मु ने इस बात पर जोर दिया कि यह क्षेत्र तेजी से वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकृत हो रहा है।

उन्होंने कहा, “हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। प्रत्येक भारतीय लघु उद्यम को केवल घरेलू बाजारों के लिए उत्पादन करने वाले क्षेत्र से आगे बढ़कर वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनना होगा।”

विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल परिवर्तन और नियामक ढांचे में सुधार, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) के विकास के अगले चरण को गति देने में निर्णायक कारक साबित होंगे।

इस सम्मेलन में नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, वित्तीय संस्थान और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ अगली पीढ़ी के ऋण देने के तंत्र, डिजिटलीकरण और निर्यात प्रतिस्पर्धा पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित हुए।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने उद्यम पोर्टल और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) जैसे सरकार समर्थित डिजिटल प्लेटफॉर्मों को बाजार तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और बिचौलियों को समाप्त करने में महत्वपूर्ण सहायक बताया। हालांकि, उन्होंने लघु व्यवसायों की व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक जागरूकता और क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर बल दिया।

दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार की सचिव पद्मा जायसवाल ने कहा, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाओं जैसी परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों में भारतीय एसएमई के लिए 500 अरब डॉलर के अतिरिक्त बाजार अवसर खोलने की क्षमता है।”

उन्होंने भारत के निर्यात और जीडीपी में डिजिटल सेवाओं के लगभग 25 प्रतिशत योगदान पर भी प्रकाश डाला। जायसवाल ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जुड़कर एसएमई सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ सकते हैं, संचालन को सुव्यवस्थित कर सकते हैं और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “डिजिटल एकीकरण अब वैकल्पिक नहीं रहा। वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने, दक्षता में सुधार करने और संचालन का विस्तार करने के लिए लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए यह आवश्यक है।”