भारत का डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर दुनिया के लिए बेंचमार्क, प्राइवेट नेटवर्क्स को भी पीछे छोड़ सकता है यूपीआई : रिपोर्ट

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    नई दिल्ली, 21 फरवरी (आईएएनएस)। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भारत के डिजिटल पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर को ग्लोबल बेंचमार्क मानती है और भारतीय यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) ने दिखाया है कि सरकारी मॉडल प्राइवेट नेटवर्क्स को पछाड़ सकते हैं। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

    इंटरेस्ट.को.एनजेड की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम यूपीआई ने दिखाया है कि समावेशन और विस्तार को एक साथ बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, इस बात को साबित किया कि सरकारी पेमेंट मॉडल भी निजी नेटवर्क को पीछे छोड़ सकते हैं।

    रिपोर्ट में कहा कि यूपीआई के जरिए एक अरब लोगों के बीच प्रति वर्ष 170 अरब से अधिक बार, तत्काल और किफायती रूप से पैसों का हस्तांतरण करके, भारत ने यह साबित कर दिया कि “विश्व के डिजिटल फाइनेंशियल हाइवे एक दिन देश से होकर गुजर सकते हैं।” और “एक वैश्विक आर्थिक और उच्च-तकनीकी महाशक्ति” के रूप में अपने उदय का संकेत दिया है।

    रिपोर्ट में कहा गया,”एक ऐसा देश, जिसने पहले के समय में विदेशी मुद्रा की कमी और बाहरी खतरों को झेला है। पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर में इस तरह की महारत हासिल करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।”

    रिपोर्ट के अनुसार, भारत डिजिटल भुगतान को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखता है, न कि किसी प्रीमियम निजी सेवा के रूप में। यह बात यूपीआई की 2024 तक 4 करोड़ सामान्य उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने से स्पष्ट होती है, जो 2017 में 3 करोड़ थे।

    यूपीआई की तुलना अमेरिका के वीजा और मास्टरकार्ड जैसे भुगतान नेटवर्क से करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि “भारत का एक सार्वजनिक बुनियादी ढांचा, जो उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क है, पहले से ही दुनिया के निजी भुगतान दिग्गजों के बराबर प्रतिस्पर्धा कर रहा है और उनसे कहीं अधिक तेजी से बढ़ रहा है।”

    चीन के अलीपे और वीचैट पे की तुलना यूपीआई से करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि इन प्रणालियों के विपरीत, भारत का नेटवर्क एक खुला और पूरी तरह से अंतरसंचालनीय सार्वजनिक मंच है जिससे हर बैंक और फिनटेक कंपनी जुड़ सकती है।

    रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत में कुल डिजिटल भुगतान में यूपीआई का हिस्सा 80 प्रतिशत से अधिक है, और देश में लगभग सभी भुगतान डिजिटल माध्यमों से ही होते हैं।