वाशिंगटन, 11 मार्च (आईएएनएस)। व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध को तब समाप्त किया जाएगा, जब ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के सभी सैन्य लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो जाएंगे। इस अभियान को कब खत्म किया जाएगा, इसका अंतिम फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप करेंगे।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि यह सैन्य अभियान उम्मीद से तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि युद्ध कब खत्म होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राष्ट्रपति को कब लगेगा कि मिशन के सभी लक्ष्य पूरे हो गए हैं।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए लेविट ने कहा कि अभियान तब समाप्त होगा, जब कमांडर-इन-चीफ यानी राष्ट्रपति यह तय करेंगे कि सैन्य उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल कर लिया गया है और ईरान पूरी तरह और बिना शर्त आत्मसमर्पण की स्थिति में पहुंच गया है, चाहे वह औपचारिक रूप से इसकी घोषणा करे या नहीं।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने इस अभियान के लिए लगभग 4 से 6 सप्ताह का समय अनुमानित किया था। राष्ट्रपति और अमेरिकी सेना का शुरुआती आकलन भी यही था कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के सभी लक्ष्य हासिल करने में करीब 4 से 6 सप्ताह लग सकते हैं।
इस अभियान के मुख्य उद्देश्यों में ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना, उसकी नौसेना को कमजोर करना और उसे परमाणु हथियार हासिल करने से हमेशा के लिए रोकना शामिल है। इसके साथ ही क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित उग्रवादी संगठनों को भी कमजोर करना इस अभियान का हिस्सा है।
व्हाइट हाउस के अनुसार, अब तक इस अभियान के दौरान ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया गया है। लेविट ने बताया कि अब तक दुश्मन के 5 हजार से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है।
उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू होने के बाद से ईरान के जवाबी हमलों में काफी कमी आई है। ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में 90 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि ड्रोन हमलों में लगभग 35 प्रतिशत की कमी आई है।
अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसैनिक ताकत को भी निशाना बनाया है। लेविट ने कहा, “हमने 50 से ज़्यादा ईरानी नेवी वेसल को नष्ट कर दिया है, जिसमें एक बड़ा ड्रोन कैरियर शिप भी शामिल है।”
व्हाइट हाउस का कहना है कि अब ईरान की नौसेना क्षेत्र के प्रमुख समुद्री मार्गों में प्रभावी तरीके से काम करने की स्थिति में नहीं है। आकलन के अनुसार ईरानी नौसेना की युद्ध क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है।
लेविट ने बताया कि अमेरिकी सेना अब ईरान के हथियार निर्माण से जुड़े ढांचे को भी नष्ट करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत ईरान की मिसाइल बनाने वाली संरचना को खत्म करने की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमारे जबरदस्त बी-2 बॉम्बर्स ने हाल ही में गहराई में दबी मिसाइल जगहों पर दर्जनों 2,000 पाउंड के पेनेट्रेटर बम गिराए हैं।”
व्हाइट हाउस ने दोहराया कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का मुख्य उद्देश्य ईरान की उस क्षमता को खत्म करना है, जिससे वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सके। इस अभियान के तहत ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना, उसके मिसाइल उद्योग को खत्म करना, क्षेत्र में सक्रिय उसके आतंकवादी प्रॉक्सी की ताकत कम करना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
उन्होंने कहा, “जब ये मकसद पूरे हो जाएंगे, तो आखिरकार यह ऑपरेशन खत्म करना प्रेसिडेंट पर निर्भर करेगा।”
व्हाइट हाउस के मुताबिक, अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी तब शुरू किया जब वाशिंगटन इस नतीजे पर पहुंचा कि ईरान न्यूक्लियर हथियार हासिल करने और अपनी मिसाइल क्षमताओं को बढ़ाने की ओर बढ़ रहा है।

