नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को लेकर बात करते हुए कतर में भारत के पूर्व राजदूत के.पी. फैबियन ने शनिवार को कहा कि ईरान स्मार्ट शतरंज की चाल चल रहा है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान यह दर्शाते हैं कि वह कल्पनाओं की दुनिया में जी रहे हैं।
न्यूज एजेंसी आईएनएस से बात करते हुए, पूर्व डिप्लोमैट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के कहने के उलटपूरी तरह बंद नहीं है। ईरान कह रहा है कि मित्र देशों से जुड़े जहाज जा सकते हैं, लेकिन वे नहीं जो अमेरिका, इजरायल और उनके साथियों से जुड़े हैं।”
‘उनके साथियों’ शब्दों पर जोर देते हुए पूर्व राजदूत के.पी. फैबियन ने कहा, “ये शब्द लिखे नहीं गए हैं, लेकिन मुझे लगता है कि हम समझ गए हैं। उनका मतलब जीसीसी (गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल) है। क्योंकि जीसीसी में अमेरिका के जो बेस हैं, वहीं से वे ईरान पर हमला कर रहे हैं।”
28 फरवरी से लेकर अब तक फ्रांस का जहाज पहली बार होर्मुज से सफल ट्रांजिट कर सका। फैबियन के लिए यह “बहुत दिलचस्प है, क्योंकि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रेसिडेंट ट्रंप से पब्लिक में कहा था कि इसका हल डिप्लोमैटिक है, मिलिट्री नहीं।
इसके अलावा, पूर्व राजदूत ने बताया कि जापान की मित्सुई ओएसके लाइन्स का होर्मुज स्ट्रेट को पार करना ग्लोबल एनर्जी सप्लाई चेन के लिए बहुत जरूरी नहीं है, क्योंकि वहां लगभग 200 जहाज इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा, इसलिए ईरान ‘मित्र देशों’ के कुछ जहाजों को गुजरने दे रहा है। यह जापान के लिए एक इशारा था।”
हाल ही में, जब जापानी प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति ट्रंप से मिलीं, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने उन्हें पर्ल हार्बर घटना के बारे में याद दिलाया और फिर उनसे आगे बढ़ने के लिए कहा।
फैबियन के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप चाहते थे कि जापानी नेवी को अमेरिकियों से ऑर्डर लेने के लिए भेजा जाए।
उन्होंने कहा, “ट्रंप का नाटो देशों से अमेरिका की मदद करने का आइडिया ज्यादा समझ में नहीं आता। इसका मतलब है कि जर्मनी, इटली, ब्रिटेन अपनी नेवी को अमेरिकन एडमिरल से ऑर्डर लेने के लिए भेजेंगे, क्योंकि एक कॉमन कमांडर के बिना आपके पास दस नेवी नहीं हो सकतीं।”
उन्होंने जोर देकर कहा, “ट्रंप ने इसे पब्लिक में नहीं बताया है, लेकिन असली मतलब यही है।”
फैबियन के अनुसार, ट्रंप चाहते हैं कि नाटो देश अमेरिका की मदद करें, लेकिन इसका मतलब होगा कि जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसी नौसेनाएं अमेरिकी कमांड के तहत काम करें, जो व्यावहारिक नहीं है।
ट्रंप के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलकर तेल से भारी मुनाफा कमाने की बात कही थी, फैबियन ने कहा, “यह संभव नहीं है। ट्रंप कल्पनाओं की दुनिया में जी रहे हैं।” ट्रंप के बयानों में अक्सर स्पष्टता की कमी होती है और उनके आज और कल के बयानों में अंतर होता है।
फैबियन ने अंत में कहा कि ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं हैं और स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है।


