इजरायली सेना ने गाजा में एक आतंकवादी को मार गिराने का दावा किया

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यरूशलम, 15 फरवरी (आईएएनएस)। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने दावा किया है कि उसकी सेना ने उत्तरी गाजा में एक आतंकवादी को मार गिराया है।

आईडीएफ ने शनिवार (स्थानीय समय) को एक बयान में कहा कि सैनिकों ने एक आतंकवादी की पहचान की, जिसके बाद उसे मार गिराया गया। उसने ‘येलो लाइन’ पार की थी, जो युद्धविराम के तहत इजरायली नियंत्रण वाले क्षेत्रों को चिन्हित करती है। खतरा होने की आशंका के चलते उसे इजरायली सेना ने मार गिराया।

आईडीएफ ने कहा, “दक्षिणी कमान में इजरायली सैनिक युद्धविराम समझौते के अनुसार तैनात हैं और किसी भी तत्काल खतरे को समाप्त करने के लिए ऑपरेशन जारी रखेंगे।”

फिलिस्तीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी डब्ल्यूएएफए ने जानकारी दी कि शनिवार को पहले दक्षिणी और सेंट्रल गाजा में इजरायली सेना की ओर से इमारतों को ध्वस्त करने की कार्रवाई के दौरान कई अन्य लोग घायल हो गए थे।

न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शनिवार को ही फिलिस्तीनी सामाजिक विकास मंत्री समाह हमाद ने कहा कि गाजा में 85 प्रतिशत आबादी को आपातकालीन राहत और रिकवरी सहायता की जरूरत है। हमाद ने रामल्लाह में बताया कि युद्ध से पहले जहां 86 हजार परिवार सहायता के जरूरतमंद थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 3.20 लाख हो गई है।

हमाद ने कहा, “गाजा पट्टी में स्थिति लगातार कठिन होती जा रही है और इसका मुख्य कारण इजरायली कब्जे की ओर से जरूरी आपूर्ति को प्रवेश की अनुमति न देना है।” हमाद ने कहा कि उनका मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय और संयुक्त राष्ट्र निकायों के साथ समन्वय कर वित्तीय सहायता जुटा रहा है और इजरायल पर खाद्य पदार्थ, दवाइयां व अन्य जरूरी वस्तुओं के प्रवेश की अनुमति देने के लिए दबाव बना रहा है।

हमास की ओर से संचालित गाजा मीडिया कार्यालय ने मंगलवार को कहा कि 10 अक्टूबर 2025 को सीजफायर समझौता लागू होने के बाद से 31,178 ट्रक इलाके में आ चुके हैं, जबकि कुल 72 हजार ट्रकों की प्लानिंग थी।

एक बयान में कार्यालय ने कहा कि मानवीय सहायता, वाणिज्यिक आपूर्ति और ईंधन सहित शिपमेंट की अनुपालन दर लगभग 43 प्रतिशत थी। इस बीच, फिलिस्तीनी एनजीओ नेटवर्क के हेड अमजद अल-शावा ने शिन्हुआ को बताया कि इजरायल की मौजूदा पाबंदियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सामने आ रही रुकावटों की वजह से मानवीय मदद कम हो रही है।

उन्होंने आगे कहा कि एन्क्लेव में आने वाली मदद की मात्रा असल जरूरतों से बहुत कम है और मेडिकल सप्लाई अभी मांग का सिर्फ लगभग 10 प्रतिशत ही पूरा कर पा रही है।