पलक्कड़, 11 फरवरी (आईएएनएस)। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले केरल का पलक्कड़ जिला संभावित राजनीतिक फेरबदल के चलते सुर्खियों में है। यहां तेजी से बदलते समीकरण राज्य की चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, माकपा (सीपीआई-एम) के वरिष्ठ नेता पी.के. ससी और भाजपा की प्रमुख नेता प्रमिला ससीधरन कांग्रेस में शामिल होने को लेकर सक्रिय बातचीत कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशन की ‘पुथुयुग यात्रा’ के पलक्कड़ पहुंचने पर ससीधरन एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम को अंजाम देना चाहती हैं।
कांग्रेस खेमे की ओर से ससीधरन को शोरनूर या ओट्टापलम सीट से टिकट देने का आश्वासन दिए जाने की चर्चा है, यदि वह पार्टी में शामिल होती हैं।
इसी बीच, पी.के. ससी के बारे में संकेत मिल रहे हैं कि वह अपनी स्वतंत्र राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए एक नए क्षेत्रीय दल के गठन पर भी विचार कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो पारंपरिक वाम समर्थकों का एक वर्ग उनकी ओर आकर्षित हो सकता है।
राजनीतिक हलचल को और तेज करने वाली खबर यह है कि कोझिंजम्पारा, मन्नारकाड और ओट्टापलम में माकपा के असंतुष्ट नेता ‘डेमोक्रेटिक मार्क्सिस्ट पार्टी’ (डीएमपी) नाम से एक नया मंच बनाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि यह अभी अटकलों का विषय है कि ससी इस पहल का नेतृत्व करेंगे या अंततः कांग्रेस के साथ हाथ मिलाएंगे।
पलक्कड़ जिला वामपंथ का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में माकपा नीत एलडीएफ ने यहां की 12 में से 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस नीत यूडीएफ को सिर्फ दो सीटें मिली थीं। भाजपा ने भी दो विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रहकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी, जिससे जिले की प्रतिस्पर्धी राजनीतिक स्थिति का संकेत मिलता है।
इस जिले का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि दिग्गज कम्युनिस्ट नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वी.एस. अच्युतानंदन ने 2001 से लगातार चार बार यहां से जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। हालांकि अब खबर है कि उनके लंबे समय तक निजी सहायक रहे ए. सुरेश को कांग्रेस उसी सीट से मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है।
दूसरी ओर, अच्युतानंदन के बेटे वी.ए. अरुणकुमार का नाम भी माकपा की संभावित उम्मीदवारों की सूची में बताया जा रहा है।
एक साथ कई संभावित राजनीतिक परिदृश्यों के उभरने से पलक्कड़ की राजनीति में अस्थिरता की स्थिति बनती दिख रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यहां कोई बड़ा राजनीतिक विचलन होता है तो उसका नुकसान सबसे अधिक वाम मोर्चे को उठाना पड़ सकता है।

