महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, हर विभाग सिर्फ 2 आईटी कंसल्टेंट कर सकेगा नियुक्त

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मुंबई, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री के अधीन काम करने वाले महाराष्ट्र के सामान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी विभागों, निगमों और प्राधिकरणों में आईटी और गैर आईटी कंसल्टेंट्स की बड़ी संख्या में हो रही नियुक्तियों पर रोक लगाने का फैसला किया है।

सरकारी आदेश के अनुसार, अब कोई भी विभाग दो से ज्यादा आईटी कंसल्टेंट नियुक्त नहीं कर सकेगा। इसके अलावा, अन्य कंसल्टेंट्स की नियुक्ति भी तय प्रक्रिया का पालन करने के बाद ही की जा सकेगी।

सरकार ने देखा है कि कई विभागों, क्षेत्रीय कार्यालयों और निगमों में ‘सलाहकार सेवाओं’ के नाम पर बड़ी संख्या में कंसल्टेंट रखे जा रहे हैं। खासकर रिटायर अधिकारियों को इन पदों पर नियुक्त करने का चलन बढ़ा है।

आदेश में कहा गया है कि हर विभाग में अधिकतम दो आईटी कंसल्टेंट ही रखे जा सकते हैं। जिन विभागों में अभी दो से ज्यादा कंसल्टेंट हैं, वे 30 अप्रैल 2026 तक काम कर सकते हैं लेकिन 1 मई 2026 से किसी भी हालत में दो से ज्यादा आईटी कंसल्टेंट नहीं रहेंगे।

अब किसी भी तरह के कंसल्टेंट की नियुक्ति के लिए सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय से पहले अनुमति लेना जरूरी होगा। इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी विभाग प्रमुखों और कार्यालय प्रमुखों की होगी, हालांकि यह नियम मुख्यमंत्री कार्यालय, उपमुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य सचिव कार्यालय, आईटी विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी निदेशालय पर लागू नहीं होगा।

सरकार का यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान के बाद आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी विभागों को पारदर्शिता, समयबद्धता और भरोसे के साथ काम करना चाहिए, ताकि लोगों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके और विकसित महाराष्ट्र का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

वे 150-दिवसीय ई-गवर्नेंस सुधार कार्यक्रम के तहत आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान बेहतर काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने आईटी विभाग को ‘वन स्टेट, वन पोर्टल’ योजना लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य कई सरकारी वेबसाइट्स से होने वाली परेशानी को खत्म कर एक ही प्लेटफॉर्म पर सभी सेवाएं उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि लोगों के लिए सरकारी सेवाओं को आसान बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।