सर्किल रेट के लिए ‘माइक्रो-जोनिंग’ शुरू करेगी महाराष्ट्र सरकार, शुरुआत एमएमआर से होगी

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मुंबई, 18 मार्च (आईएएनएस)। महाराष्ट्र विधानसभा ने बुधवार को सर्वसम्मति से ‘महाराष्ट्र स्टाम्प (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण करना और स्टाम्प शुल्क वापसी (रिफंड) के आवेदनों के भारी बैकलॉग का निपटारा तेजी से करना है।

चर्चा के दौरान मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा केंद्रीकृत प्रणाली के कारण नागरिकों को मध्यम आकार के रिफंड दावों के लिए भी मुंबई तक की यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे काफी देरी होती थी और ‘लालफीताशाही’ को बढ़ावा मिलता था।

मंत्री बावनकुले ने सर्किल रेट (आरआर) के निर्धारण के लिए ‘माइक्रो-जोनिंग’ लागू करने की घोषणा की। यह नीतिगत बदलाव व्यापक, क्षेत्र-आधारित मूल्यांकन से हटकर अधिक सूक्ष्म, वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ओर एक कदम है, जिसका उद्देश्य संपत्ति कराधान में आर्थिक असमानताओं को दूर करना है।

उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद, जोन-वार और प्लॉट-वार आरआर दरें पंजीकरण महानिरीक्षक (आईजीआर) पोर्टल के माध्यम से एक पारदर्शी, डाउनलोड करने योग्य पीडीएफ प्रारूप में उपलब्ध कराई जाएंगी।

मंत्री ने कहा, “माइक्रो-जोनिंग की प्रारंभिक शुरुआत 1 अप्रैल 2027 से होगी, जिसमें मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) और पुणे पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जहां छोटे क्षेत्रों के भीतर सामाजिक-आर्थिक असमानताएं सबसे अधिक स्पष्ट हैं, जैसे कि वर्ली, परेल और बोरीवली।”

राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह झुग्गी-झोपड़ियों और झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) परियोजनाओं, चॉलों और पुरानी, गैर-पुनर्विकसित इमारतों के साथ-साथ औद्योगिक, वाणिज्यिक और आवासीय उपयोग के लिए अलग-अलग दरें निर्धारित करे।

उन्होंने आगे कहा कि इसके बाद महाराष्ट्र के शेष हिस्सों में आरआर निर्धारण के लिए माइक्रो-जोनिंग लागू की जाएगी।

मंत्री ने मौजूदा व्यवस्था की एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया, जिसके तहत आलीशान इमारतों से सटे छोटे मकानों, झुग्गी-झोपड़ियों और चॉलों पर एक ही टैक्‍स दर लागू होती है। सूक्ष्म क्षेत्रीकरण से विभाग को इन संरचनाओं के बीच अंतर करने में मदद मिलेगी, भले ही वे एक ही भौगोलिक क्षेत्र में आती हों।

सरकार प्रत्येक संपत्ति का मानचित्रण करने के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) तकनीक का उपयोग कर रही है। इससे पूरे मोहल्ले या क्षेत्र पर एक समान दर लागू करने के बजाय भूखंड और भवन के अनुसार सटीक मूल्य निर्धारण संभव हो सकेगा।

मंत्री बावनकुले ने कहा कि छोटे या पुराने फ्लैटों के खरीदारों को अक्सर वास्तविक खरीद मूल्य की तुलना में कहीं अधिक स्टांप शुल्क का भुगतान करना पड़ता है, क्योंकि आसपास के नए विकास कार्यों के कारण आरआर दरें बढ़ जाती हैं।

माइक्रो-जोर्निंग का उद्देश्य विशिष्ट सूक्ष्म बाजारों की वास्तविक बाजार स्थितियों के साथ आरआर दरों को अधिक निकटता से संरेखित करना है।

इस कदम से कम आय वाले निवासियों को राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि उच्च स्तरीय वाणिज्यिक और आवासीय परियोजनाओं का सही मूल्यांकन हो, जिससे विकासकर्ताओं को कम औसत दरों का उपयोग करके कम विकास शुल्क और प्रीमियम का भुगतान करने से रोका जा सके।