मुंबई, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) वित्त वर्ष 26 में सालाना आधार पर 12.2 प्रतिशत बढ़कर 73.73 लाख करोड़ रुपए हो गया है। इस दौरान इंडस्ट्री का कुल एसेट बेस 8 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। यह जानकारी एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की ओर से जारी डेटा में दी गई।
एम्फी के डेटा में बताया गया कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता के बावजूद सक्रिय इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में इनफ्लो बढ़कर 40,450.26 करोड़ रुपए हो गया है, जो कि जुलाई 2025 के बाद अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह फरवरी में 25,977.81 करोड़ रुपए पर था।
मार्च में एसआईपी इनफ्लो 32,087 करोड़ रुपए रहा है, जो कि इससे पिछले महीने 29,845 करोड़ रुपए पर था। यह दिखाता है कि रिटेल निवेशक बाजार की अस्थिरता के बीच लंबी अवधि के नजरिए से निवेश कर रहे हैं।
विश्लेषकों ने कहा कि इक्विटी इनफ्लो में इस उछाल का कारण साल के अंत में पोर्टफोलियो आवंटन, पश्चिम एशिया में तनाव के बाद हालिया गिरावट में कम मूल्यांकन पर निवेश करना है।
हालांकि, मार्च में म्यूचुअल फंड उद्योग में 2.39 लाख करोड़ रुपए का नेट आउटफ्लो दर्ज किया गया, जबकि फरवरी में 94,530 करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो आया था। मार्च में डेट म्यूचुअल फंड में 2.94 लाख करोड़ रुपए का आउटफ्लो दर्ज किया गया।
इसके अतिरिक्त, मार्च में गोल्ड ईटीएफ इनफ्लो घटकर 2,266 करोड़ रुपए रह गया है, जो कि फरवरी में यह 5,254.95 करोड़ रुपए था।
इक्विटी कैटेगरी में मार्च में फ्लेक्सी-कैप फंडों में सबसे अधिक 10,054.12 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जो फरवरी में 6,924.65 करोड़ रुपए था। स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों में क्रमशः 6,263.56 करोड़ रुपए और 6,063.53 करोड़ रुपए का निवेश हुआ, जबकि पिछले महीने यह क्रमशः 3,881.06 करोड़ रुपए और 4,002.99 करोड़ रुपए था। वहीं, लार्ज-कैप फंडों में 2,997.84 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।

